मिड्ढा ने पूछा राजनीति को साधना कैसे बनाएं, महाराज ने कहा—“समाज को सुख और सेवा देकर”
हरियाणा के डिप्टी स्पीकर मिड्ढा ने हाल ही में समाज सेवक और आध्यात्मिक गुरु प्रेमानंद महाराज से भेंट की। इस मुलाकात का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक जीवन में नैतिकता और समाज सेवा के महत्व को समझना था। डिप्टी स्पीकर ने महाराज से पूछा कि राजनीति को कैसे साधना की तरह अपनाया जा सकता है, ताकि समाज के कल्याण और जनता की भलाई में योगदान दिया जा सके।
प्रेमानंद महाराज ने इस सवाल का उत्तर देते हुए कहा कि राजनीति केवल सत्ता या व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं होनी चाहिए। इसे एक साधना के रूप में तब माना जा सकता है, जब नेता अपने पद और जिम्मेदारी का उपयोग समाज की भलाई के लिए करता है। महाराज ने जोर देते हुए कहा कि यदि राजनीति को सेवा का माध्यम बनाया जाए और समाज के कमजोर वर्ग, जरूरतमंद और गरीबों के कल्याण पर ध्यान दिया जाए, तो वही सच्ची साधना कहलाती है।
मिड्ढा ने बातचीत के दौरान यह भी पूछा कि दैनिक जीवन में राजनीतिक नेताओं को किन मूल्यों को अपनाना चाहिए। महाराज ने कहा कि ईमानदारी, पारदर्शिता, अनुशासन और जनता के प्रति जिम्मेदारी इन मूल्यों का आधार हैं। इसके अलावा, नेताओं को व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं के बजाय समाज की समस्याओं और लोगों की जरूरतों को प्राथमिकता देनी चाहिए।
इस भेंट के दौरान डिप्टी स्पीकर ने महाराज से प्रेरणा लेते हुए कहा कि राजनीति में सेवा भाव बनाए रखना और समाज को सुख-शांति पहुंचाना ही असली उद्देश्य होना चाहिए। दोनों ने आगे भी इस तरह के संवाद और मार्गदर्शन को जारी रखने पर सहमति व्यक्त की।
राजनीतिक और सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मार्गदर्शन से नेताओं के दृष्टिकोण में बदलाव आ सकता है और राजनीति केवल सत्ता का साधन न रहकर जनता की भलाई और समाज सेवा का माध्यम बन सकती है। इस मुलाकात ने यह संदेश भी दिया कि आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों को अपनाकर ही सशक्त और न्यायपूर्ण राजनीतिक व्यवस्था संभव है।
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