नारनौल में चल रही विश्वविद्यालयीय परीक्षाओं के दौरान अनुशासन लागू करना एक अधिकारी को भारी पड़ गया।
हरियाणा के नारनौल में परीक्षा व्यवस्था को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रेवाड़ी स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय (आईजीयू) की परीक्षाएं जिले में चल रही हैं, जिनके तहत विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर प्रशासनिक अधिकारी तैनात किए गए थे। इसी दौरान एक परीक्षा केंद्र पर अनुशासन सख्ती से लागू करने वाले डिप्टी सुपरिटेंडेंट को अचानक उनकी ड्यूटी से हटा दिया गया।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित अधिकारी परीक्षा के दौरान नकल पर सख्ती से रोक लगा रहे थे। उन्होंने परीक्षार्थियों की गहन जांच की और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई भी की। इससे कुछ परीक्षार्थियों और उनके परिजनों में नाराजगी फैल गई। आरोप है कि दबाव बढ़ने के बाद प्रशासन ने बीच ड्यूटी में ही डिप्टी सुपरिटेंडेंट को रिलीव कर दिया।
यह कार्रवाई परीक्षा केंद्र पर मौजूद अन्य स्टाफ और विद्यार्थियों के बीच चर्चा का विषय बन गई। कई लोगों का मानना है कि यदि अधिकारी नियमों के तहत काम कर रहा था, तो उसके खिलाफ इस तरह का कदम गलत संदेश देता है। इससे भविष्य में परीक्षा ड्यूटी कर रहे कर्मचारियों का मनोबल भी प्रभावित हो सकता है।
विश्वविद्यालय से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि ड्यूटी में बदलाव प्रशासनिक कारणों से किया गया है और इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को सुचारु रखना था। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है। शिक्षा जगत से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि नकल जैसी समस्याओं पर कड़ी कार्रवाई जरूरी है और ऐसे में सख्ती बरतने वाले अधिकारियों को संरक्षण मिलना चाहिए।
स्थानीय स्तर पर भी इस मामले को लेकर चर्चाएं तेज हैं। अभिभावकों का एक वर्ग चाहता है कि परीक्षाएं ईमानदारी और अनुशासन के साथ संपन्न हों, ताकि मेहनती छात्रों के साथ अन्याय न हो। वहीं, कुछ लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और प्रशासनिक समर्थन कितना जरूरी है।
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