सरकारी पदोन्नति पर न्यायिक सवाल, अभियोजन सेवा का मामला अदालत में

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जिला अटॉर्नी पदोन्नति को लेकर कानूनी टकराव, नियमों के उल्लंघन का आरोप

हरियाणा में जिला अटॉर्नी के पदों पर की गई पदोन्नतियों को लेकर उठा विवाद अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। राज्य में 22 जिला अटॉर्नियों की प्रमोशन प्रक्रिया को चुनौती देते हुए दायर याचिका पर अदालत ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस घटनाक्रम से अभियोजन विभाग और प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि पदोन्नति प्रक्रिया में भारतीय न्याय संहिता से जुड़े नए कानून बीएनएसएस (BNSS) की संबंधित धाराओं का उल्लंघन किया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्रमोशन के दौरान न तो निर्धारित योग्यता मानकों का पूरी तरह पालन किया गया और न ही प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती गई। इसके चलते योग्य अधिकारियों के अधिकार प्रभावित हुए हैं।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया इसे गंभीर विषय मानते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जवाब तलब किया है। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि यदि पदोन्नति में नियमों और कानून का उल्लंघन हुआ है, तो उस पर न्यायिक हस्तक्षेप आवश्यक होगा। फिलहाल मामले की अगली सुनवाई तक सरकार से सभी संबंधित रिकॉर्ड और प्रक्रिया का ब्योरा पेश करने को कहा गया है।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि बीएनएसएस के तहत अभियोजन व्यवस्था में जो नए प्रावधान लागू किए गए हैं, उन्हें नजरअंदाज कर पदोन्नति की गई। इससे न केवल कानून की भावना को ठेस पहुंची है, बल्कि अभियोजन प्रणाली की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हुए हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस पर रोक नहीं लगी, तो भविष्य में ऐसे विवाद और बढ़ सकते हैं।

वहीं, सरकारी पक्ष की ओर से अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि सरकार कानूनी प्रावधानों के अनुसार ही प्रमोशन किए जाने का दावा करेगी। प्रशासनिक स्तर पर मामले से जुड़े दस्तावेज एकत्र किए जा रहे हैं।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह मामला केवल पदोन्नति तक सीमित नहीं है, बल्कि नई आपराधिक प्रक्रिया संहिता के क्रियान्वयन से भी जुड़ा है। हाईकोर्ट का फैसला न केवल इस विवाद का समाधान करेगा, बल्कि भविष्य में अभियोजन सेवाओं में प्रमोशन की दिशा भी तय कर सकता है।

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