डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने अपील खारिज की; बेटे की बीमारी के चलते किस्तें नहीं भर पाए आवंटी
चंडीगढ़ में स्मॉल फ्लैट को लेकर चल रहे विवाद में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने आवंटी की अपील खारिज कर दी है। अदालत ने संबंधित प्राधिकरण के फ्लैट खाली कराने के आदेश को बरकरार रखा। मामले में आवंटी ने दलील दी थी कि उसके बेटे की कैंसर से मृत्यु हो जाने के कारण वह समय पर किस्तें जमा नहीं कर पाया।
जानकारी के अनुसार, आवंटी को सरकारी योजना के तहत स्मॉल फ्लैट आवंटित किया गया था। शर्तों के अनुसार निर्धारित समय में किस्तों का भुगतान करना अनिवार्य था। लंबे समय तक किस्तें जमा न होने पर प्राधिकरण ने अलॉटमेंट रद्द कर फ्लैट खाली करने का नोटिस जारी किया।
आवंटी ने इस आदेश के खिलाफ चंडीगढ़ जिला न्यायालय में अपील दायर की और पारिवारिक परिस्थितियों का हवाला देते हुए राहत की मांग की। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पाया कि भुगतान में चूक स्वीकार की गई है और नियमों के तहत प्राधिकरण की कार्रवाई उचित है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सहानुभूति के आधार पर नियमों में छूट नहीं दी जा सकती, खासकर जब लंबे समय तक बकाया राशि जमा न की गई हो। इसके साथ ही फ्लैट खाली कराने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की अनुमति दे दी गई।
इस फैसले के बाद आवंटी को निर्धारित अवधि के भीतर फ्लैट खाली करना होगा। कानूनी जानकारों के अनुसार, ऐसे मामलों में समय पर किस्तों का भुगतान न करने पर आवंटन रद्द किया जा सकता है, भले ही व्यक्तिगत परिस्थितियां कितनी भी गंभीर क्यों न हों।
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