नामांतरण के लिए परिवार 20 साल से भटक रहा, गुरुग्राम कोर्ट में आज सुनवाई
गुरुग्राम में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जिला नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग (DETC) पर फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर करीब ₹20 करोड़ कीमत का प्लॉट बेचने का आरोप लगा है। पीड़ित परिवार का कहना है कि वे पिछले करीब 20 वर्षों से प्लॉट को अपने नाम कराने के लिए सरकारी दफ्तरों और अदालतों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें न्याय नहीं मिल पाया। मामले की अहम सुनवाई आज गुरुग्राम कोर्ट में होनी है।
पीड़ित परिवार के अनुसार, संबंधित प्लॉट उनके नाम पर वैध रूप से आवंटित था, लेकिन बाद में कथित तौर पर फर्जी कागजात तैयार कर किसी अन्य व्यक्ति को बेच दिया गया। आरोप है कि इस पूरे प्रकरण में DETC कार्यालय की भूमिका संदिग्ध रही और बिना उचित जांच-पड़ताल के दस्तावेज़ों को मंजूरी दे दी गई। जब परिवार ने इसका विरोध किया और अपने कागजात पेश किए, तो मामला उलझता चला गया।
परिवार का कहना है कि प्लॉट की बाजार कीमत अब लगभग ₹20 करोड़ तक पहुंच चुकी है, लेकिन वे न तो उसका कब्जा ले पा रहे हैं और न ही कानूनी तौर पर नामांतरण करा पा रहे हैं। पिछले दो दशकों में उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों से शिकायत की, आरटीआई लगाई और प्रशासनिक स्तर पर गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला।
मामला अदालत में पहुंचने के बाद भी सुनवाई लंबी खिंचती रही। आज होने वाली सुनवाई को पीड़ित परिवार बेहद अहम मान रहा है, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि कोर्ट इस पूरे प्रकरण में DETC की भूमिका की गहराई से जांच के आदेश दे सकता है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला न सिर्फ विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करेगा, बल्कि सरकारी सिस्टम में बैठे अधिकारियों की जवाबदेही भी तय करेगा।
वहीं, कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि फर्जी दस्तावेज़ों के आधार पर बिक्री साबित होती है, तो यह गंभीर आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आएगा। इसमें धोखाधड़ी, कूटरचना और सरकारी पद के दुरुपयोग जैसी धाराएं लग सकती हैं। फिलहाल सभी की नजरें गुरुग्राम कोर्ट की आज की सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
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