नकली एजेंटों का जाल, सट्टेबाजी के नाम पर परिवार से ठगे लाखों
हिसार में खुद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का अधिकारी बताकर की गई फर्जी रेड का सनसनीखेज मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि इस पूरे प्रकरण को पुलिस ने करीब चार महीने तक दबाए रखा। अब जब मामला उजागर हुआ है तो कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में तीन आरोपियों को हिरासत में लिया, जबकि दो संदिग्धों को पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया।
जानकारी के अनुसार, आरोपियों ने एक परिवार को यह कहकर डराया कि उनके घर का एक सदस्य ऑनलाइन सट्टेबाजी में शामिल है और उस पर जांच एजेंसी की नजर है। खुद को NIA से जुड़ा बताकर उन्होंने न सिर्फ घर में दबाव का माहौल बनाया, बल्कि कार्रवाई का डर दिखाकर मोटी रकम भी ऐंठ ली। परिवार को लगा कि मामला राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी से जुड़ा है, इसलिए उन्होंने बिना सवाल किए आरोपियों की बातों पर भरोसा कर लिया।
बताया जा रहा है कि आरोपियों ने पूरी प्लानिंग के साथ फर्जी रेड की। वे सरकारी भाषा, फर्जी पहचान पत्र और सख्त रवैये का इस्तेमाल कर खुद को असली अधिकारी साबित करते रहे। इस दौरान परिवार को मानसिक रूप से भी प्रताड़ित किया गया।
सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि घटना सामने आने के बावजूद पुलिस ने इसे लंबे समय तक सार्वजनिक नहीं किया। अब जब मामला उजागर हुआ है तो पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती तो और लोग ऐसे जाल में फंसने से बच सकते थे।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और यह पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों के पीछे कोई बड़ा गिरोह तो नहीं है। साथ ही, यह भी जांच होगी कि चार महीने तक मामला दबा क्यों रहा।
इस घटना ने आम लोगों को सतर्क कर दिया है कि किसी भी जांच एजेंसी के नाम पर डराने वालों से सावधान रहें और तुरंत स्थानीय पुलिस या संबंधित विभाग से पुष्टि करें।
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