कृषि मुद्दों को लेकर सड़कों पर उतरे किसान, प्रतीकात्मक विरोध तेज

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Farmers protest

किसानों का आक्रोश, नीतियों के खिलाफ प्रतीकात्मक प्रदर्शन से जताई नाराजगी

टोहाना में किसानों ने अपनी मांगों को लेकर एक बार फिर सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराया। ‘प्रतिरोध दिवस’ के रूप में आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में किसान एकत्र हुए और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों का कहना है कि लंबे समय से उनकी समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे उनमें गहरा असंतोष है।

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने प्रतीकात्मक रूप से प्रधानमंत्री का पुतला जलाकर अपना रोष प्रकट किया। उनका कहना था कि यह कदम ध्यान आकर्षित करने के लिए उठाया गया है, ताकि सरकार तक उनकी आवाज पहुंचे। किसानों ने आरोप लगाया कि न्यूनतम समर्थन मूल्य, फसल खरीद, कर्ज राहत और अन्य अहम मुद्दों पर अब तक ठोस समाधान नहीं निकाला गया है।

किसान नेताओं ने मंच से कहा कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से किया जा रहा है, लेकिन यदि मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया तो आने वाले समय में आंदोलन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसान अपने हक की लड़ाई के लिए संगठित हैं और पीछे हटने वाले नहीं हैं।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस प्रशासन मौके पर मौजूद रहा और स्थिति पर नजर बनाए रखी। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए गए थे। प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, हालांकि किसानों की नाराजगी साफ तौर पर दिखाई दी।

किसानों ने घोषणा की कि 12 फरवरी को एक बार फिर बड़े स्तर पर विरोध दर्ज कराया जाएगा। उस दिन जिले के अलग-अलग हिस्सों में कार्यक्रम आयोजित कर सरकार पर दबाव बनाया जाएगा। किसान संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

इस प्रदर्शन के बाद क्षेत्र में राजनीतिक चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में किसान आंदोलन का असर स्थानीय राजनीति और प्रशासनिक गतिविधियों पर भी देखने को मिल सकता है।

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