क्षेत्र के अनेक आर्थिक रूप से कमजोर परिवार इन दिनों सरकारी खाद्य सहायता प्राप्त करने के लिए परेशान हैं। लाभार्थियों का कहना है कि उन्होंने सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली हैं, इसके बावजूद उन्हें निर्धारित कोटा नहीं मिल पा रहा। पिछले कई सप्ताह से वे वितरण केंद्र और संबंधित विभाग के दफ्तरों में शिकायत दर्ज करा रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
पीड़ितों के अनुसार, डिजिटल पहचान की पुष्टि होने के बाद भी मशीन में त्रुटि, सर्वर समस्या या रिकॉर्ड अपडेट न होने जैसे कारण बताकर सामग्री देने से इनकार किया जा रहा है। इसका सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जिनकी आय सीमित है और जो दैनिक मजदूरी पर निर्भर हैं। बुजुर्ग, विधवा महिलाएं और छोटे बच्चों वाले घर विशेष रूप से प्रभावित हैं।
स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया है कि वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है। उनका कहना है कि शिकायत करने पर भी स्पष्ट जवाब नहीं मिलता और न ही समाधान के लिए कोई समयसीमा तय की जाती है। सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कराने और पात्र लोगों को तुरंत राहत उपलब्ध कराने की मांग की है।
जनप्रतिनिधियों का सुझाव है कि तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए नियमित ऑडिट कराया जाए और शिकायत निवारण तंत्र को अधिक प्रभावी बनाया जाए। उनका मानना है कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो जरूरतमंदों का भरोसा कमजोर हो सकता है। प्रभावित परिवारों को उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति सामान्य होगी और उन्हें उनका अधिकार प्राप्त होगा।
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