अस्थायी नेतृत्व से लेकर सार्वजनिक जिज्ञासा तक, पूर्व शीर्ष अफसर की बेबाक प्रतिक्रिया
हरियाणा पुलिस के पूर्व महानिदेशक ने हाल ही में अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि सेवा काल के अंतिम चरण और उसके बाद का समय किस तरह मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि जब कोई अधिकारी वर्षों तक जिम्मेदारी निभाने के बाद सक्रिय सेवा से बाहर आता है, तो लोगों की जिज्ञासा और सवाल अचानक बढ़ जाते हैं। अक्सर उनसे यह पूछा जाता है कि अब जीवन में अगला कदम क्या होगा और भविष्य की योजनें कैसी हैं।
पूर्व अधिकारी ने बताया कि उन्हें उस समय राज्य पुलिस की कमान सौंपी गई थी, जब एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अवकाश पर चले गए थे। यह जिम्मेदारी अस्थायी थी, लेकिन इसके साथ ही चुनौतियां और अपेक्षाएं पूरी तरह स्थायी जैसी ही थीं। सीमित समय में निर्णय लेना, व्यवस्था को संभालना और विभागीय संतुलन बनाए रखना आसान नहीं होता, फिर भी उन्होंने इसे अपने करियर का अहम अनुभव बताया।
उनका कहना है कि शीर्ष पद पर रहते हुए व्यक्ति लगातार सार्वजनिक निगाह में रहता है। पद से हटने के बाद भी यह ध्यान और सवाल खत्म नहीं होते। कई बार लोग अच्छे इरादे से पूछते हैं, लेकिन बार-बार एक ही सवाल सुनना थकाने वाला हो सकता है। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा कि अब वह इन सवालों के आदी हो चुके हैं और इसे जीवन के स्वाभाविक बदलाव के रूप में देखते हैं।
पूर्व डीजीपी ने यह भी संकेत दिया कि पुलिस सेवा केवल एक नौकरी नहीं, बल्कि जीवनशैली होती है। सेवा समाप्त होने के बाद भी अनुभव और जिम्मेदारी का एहसास बना रहता है। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि प्रशासनिक पदों पर रहते हुए भविष्य की तैयारी और मानसिक संतुलन बेहद जरूरी है।
उनकी इस टिप्पणी को पुलिस सेवा से जुड़े लोगों के बीच काफी अहम माना जा रहा है। यह बयान न सिर्फ एक वरिष्ठ अधिकारी की व्यक्तिगत भावना को दर्शाता है, बल्कि यह भी बताता है कि पद और पहचान से आगे भी जीवन की अपनी चुनौतियां और प्रश्न होते हैं।
![]()











