वरिष्ठ नेता का तीखा तंज, संगठन पर उठाए सवाल

12
Former MP Statement

यात्रा में दिखी गुटबाजी, स्थानीय प्रतिनिधियों की गैरमौजूदगी पर नाराज़गी

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद ने हाल ही में आयोजित कार्यक्रम के दौरान संगठन की कार्यशैली पर खुलकर असंतोष जाहिर किया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि यही रवैया बना रहा, तो आने वाले वर्षों में पार्टी को लगातार चुनावी नुकसान उठाना पड़ेगा। उनका यह बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

पूर्व सांसद ने कहा कि पार्टी नेताओं की कुछ आदतें समय के साथ बिगड़ गई हैं और वे आत्ममंथन करने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि नेतृत्व और कार्यकर्ता जमीन से जुड़े मुद्दों पर गंभीर नहीं हुए, तो चुनावी नतीजे बार-बार निराश करने वाले रहेंगे। उनका इशारा संगठन के भीतर बढ़ती गुटबाजी और आपसी तालमेल की कमी की ओर था।

उन्होंने पंचकूला में आयोजित सद्भाव यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम एकता और सामाजिक सौहार्द का संदेश देने के लिए था, लेकिन हकीकत इससे उलट नजर आई। कार्यक्रम में बाहर के क्षेत्रों से विधायक तो सक्रिय रूप से शामिल हुए, लेकिन स्थानीय जनप्रतिनिधि और नेता नदारद रहे। इस स्थिति ने संगठन की जमीनी पकड़ और स्थानीय नेतृत्व की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पूर्व सांसद का कहना था कि जब अपने ही क्षेत्र में नेता सामने नहीं आते, तो जनता के बीच क्या संदेश जाता है, इस पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी को केवल बड़े मंचों और बयानों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं और जनता से सीधा संवाद स्थापित करना होगा।

उनकी टिप्पणी को पार्टी के भीतर एक चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है। जानकारों का मानना है कि इस बयान के जरिए उन्होंने नेतृत्व को यह संकेत देने की कोशिश की है कि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो संगठन को लंबे समय तक राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ सकता है।

कार्यक्रम के बाद उनके बयान ने सियासी हलकों में बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस आलोचना को किस तरह लेता है और क्या संगठनात्मक ढांचे में कोई बदलाव देखने को मिलता है या नहीं।

Loading