राज्यभर के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों ने 8 और 9 दिसंबर को दो दिवसीय हड़ताल पर जाने का ऐलान किया है। डॉक्टरों का यह विरोध सरकार द्वारा विशेषज्ञ चिकित्सा अधिकारियों (Specialist Medical Officers – SMOs) की सीधी भर्ती के फैसले के खिलाफ है। डॉक्टरों का कहना है कि इन पदों पर पहले से सेवा दे रहे योग्य और अनुभवी डॉक्टरों को internal promotion के माध्यम से प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
डॉक्टर संगठनों ने स्पष्ट किया है कि सरकार की यह नीति न केवल वर्षों से सेवा दे रहे डॉक्टरों के साथ अन्याय है, बल्कि इससे पूरे सिस्टम का मनोबल भी टूट रहा है। उनका कहना है कि अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टर वर्षों तक ग्रामीण और कठिन क्षेत्रों में सेवाएं देते हैं, इसके बावजूद उन्हें पदोन्नति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। वहीं बाहरी उम्मीदवारों की सीधी भर्ती से उनके करियर पर गहरा असर पड़ रहा है।
डॉक्टरों के अनुसार, कई बार सरकार से बातचीत की गई, ज्ञापन भी सौंपे गए, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। मजबूरी में अब उन्हें हड़ताल जैसा कदम उठाना पड़ रहा है। डॉक्टरों ने बताया कि हड़ताल के दौरान सभी प्रकार की नियमित ओपीडी सेवाएं ठप रहेंगी, हालांकि आपातकालीन सेवाओं को चालू रखा जाएगा ताकि आम जनता को गंभीर परेशानी न हो।
उधर, हड़ताल की घोषणा के बाद स्वास्थ्य विभाग में भी हलचल तेज हो गई है। प्रशासन द्वारा वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार किया जा रहा है ताकि मरीजों को न्यूनतम परेशानी हो। वहीं सरकार और डॉक्टर संगठनों के बीच जल्द बातचीत की संभावना भी जताई जा रही है।
डॉक्टरों का कहना है कि वे सरकार के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन अपने अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाना जरूरी हो गया है। यदि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से लेती है और SMO पदों पर internal promotion की नीति लागू करती है, तो आंदोलन वापस लिया जा सकता है। फिलहाल प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में 8 और 9 दिसंबर को स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की पूरी संभावना है।
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