सद्भाव यात्रा में गुटबाजी की परतें खुलीं,
पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष देखा गया
हरियाणा के नूंह जिले में कांग्रेस द्वारा आयोजित सद्भाव यात्रा में पार्टी के आंतरिक मतभेद और गुटबाजी की झलक साफ दिखी। यात्रा के दौरान हुड्डा गुट के तीनों विधायक खुलकर समर्थन नहीं कर रहे थे, जिससे पार्टी की एकजुटता पर सवाल उठने लगे। वहीं, जिलाध्यक्ष के कार्यशैली को लेकर भी नाराजगी देखने को मिली।
सूत्रों के अनुसार, सद्भाव यात्रा का उद्देश्य पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता के बीच सौहार्द बनाए रखना और आगामी चुनावी रणनीतियों पर जोर देना था। लेकिन हुड्डा गुट के नेताओं की अलग-अलग टिप्पणियों और उदासीनता ने कार्यक्रम को प्रभावित किया। पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने भी इस दूरी को नोट किया और सोशल मीडिया पर अपनी नाराजगी व्यक्त की।
जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में यात्रा को सुचारु रूप से चलाने की कोशिश की गई, लेकिन कुछ विधायक अपने एजेंडे पर टिके रहे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह संकेत है कि पार्टी के भीतर आपसी सामंजस्य की कमी है। इस फूट का असर आगामी चुनावी तैयारियों पर भी पड़ सकता है।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इस फूट को छिपाने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय मीडिया और कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया ने इसे उजागर कर दिया। नेताओं का मानना है कि यह स्थिति सुधारने के लिए पारदर्शिता और बेहतर संवाद की जरूरत है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पार्टी जल्द ही गुटबाजी को नियंत्रित नहीं करती, तो न केवल सद्भाव यात्रा का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा, बल्कि आगामी चुनाव में भी इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। वहीं, कुछ कार्यकर्ताओं का मानना है कि हुड्डा गुट की अलग रुख अपनाने की प्रवृत्ति लंबे समय से चली आ रही है।
सद्भाव यात्रा के दौरान हुई यह घटनाक्रम कांग्रेस के लिए आंतरिक चुनौतियों को सामने लाता है। पार्टी नेतृत्व के लिए यह आवश्यक है कि वे नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच संतुलन बनाए रखें ताकि भविष्य में किसी भी तरह का विवाद जनता और संगठन पर असर न डाल सके।
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