‘शैडो प्लान’ में विपक्षी क्षेत्रों की अनदेखी, कई मंत्री-विधायक समीक्षा के घेरे में
हरियाणा में सत्तारूढ़ भाजपा की बहुचर्चित ‘शैडो प्लान’ रणनीति में बड़ी चूक सामने आई है। पार्टी की इस आंतरिक योजना का मकसद सरकार और संगठन के कामकाज की निरंतर समीक्षा कर आगामी चुनावों से पहले मजबूत स्थिति बनाना था, लेकिन इसमें विपक्षी विधायकों के हलकों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। इस लापरवाही के चलते पार्टी के भीतर ही असंतोष और सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, शैडो प्लान के तहत पार्टी ने अपने मंत्रियों और विधायकों के प्रदर्शन, जनसंपर्क और विकास कार्यों की रिपोर्ट तैयार की। हालांकि यह अभ्यास मुख्य रूप से उन्हीं क्षेत्रों तक सीमित रहा, जहां भाजपा पहले से मजबूत स्थिति में है। विपक्ष के कब्जे वाले विधानसभा क्षेत्रों में संगठनात्मक कमजोरी, जनसमस्याएं और राजनीतिक चुनौती को गंभीरता से नहीं परखा गया।
पार्टी के अंदरखाने यह माना जा रहा है कि यह रणनीतिक भूल आगामी चुनावों में नुकसान पहुंचा सकती है। विपक्षी विधायकों के क्षेत्रों में सक्रियता न बढ़ाने से वहां भाजपा की पकड़ कमजोर बनी हुई है। इसी कारण अब पार्टी नेतृत्व ने एक दर्जन से अधिक मंत्रियों और विधायकों को रडार पर ले लिया है, जिनके कामकाज और क्षेत्रीय प्रभाव की दोबारा समीक्षा की जा रही है।
बताया जा रहा है कि कई मंत्रियों और विधायकों पर आरोप है कि वे केवल अपने सुरक्षित क्षेत्रों तक सीमित रहे और विपक्षी इलाकों में संगठन को मजबूत करने के लिए ठोस पहल नहीं कर पाए। पार्टी नेतृत्व अब रिपोर्ट के आधार पर सख्त फैसले ले सकता है, जिसमें जिम्मेदारियों में बदलाव या संगठनात्मक फेरबदल भी शामिल हो सकता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा को हरियाणा में अपनी स्थिति और मजबूत करनी है, तो उसे विपक्षी क्षेत्रों में जमीनी स्तर पर काम बढ़ाना होगा। केवल सत्ता में रहते हुए योजनाओं का प्रचार काफी नहीं है, बल्कि स्थानीय मुद्दों और जनभावनाओं को समझना भी जरूरी है।
हालांकि पार्टी की ओर से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन अंदरूनी चर्चाओं से साफ है कि शैडो प्लान की कमियों को दूर करने के लिए जल्द ही नई रणनीति बनाई जा सकती है।
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