हरियाणा DGP बनने में FIR नहीं बनेगी बाधा: UPSC ने मांगी IPS सुसाइड केस की डिटेल

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IPS सुसाइड केस की जानकारी तलब; अगले हफ्ते UPSC की बैठक में DGP पैनल पर होगा मंथन

हरियाणा में पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति को लेकर अहम घटनाक्रम सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, एक IPS अधिकारी के सुसाइड केस से जुड़ी FIR को DGP चयन प्रक्रिया में बाधा नहीं माना जाएगा। इसी क्रम में UPSC (संघ लोक सेवा आयोग) ने संबंधित सुसाइड केस की विस्तृत जानकारी, जांच की स्थिति और उपलब्ध तथ्यों का ब्योरा राज्य सरकार से मांगा है।

जानकारी के मुताबिक, UPSC को यह विवरण प्रक्रिया की पारदर्शिता और तथ्यों की पूर्णता सुनिश्चित करने के लिए चाहिए। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी अधिकारी के खिलाफ लंबित FIR अपने आप में अयोग्यता नहीं होती, जब तक कि चार्जशीट, दोषसिद्धि या सेवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि न हो। ऐसे मामलों में UPSC तथ्यों का मूल्यांकन कर यह देखती है कि चयन योग्यता और वरिष्ठता के मानकों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं पड़ता।

राज्य सरकार ने DGP पद के लिए योग्य 5 वरिष्ठ IPS अधिकारियों का डोजियर तैयार कर UPSC को भेजने की तैयारी कर ली है। इन डोजियर में सेवा रिकॉर्ड, वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR/APAR), सतर्कता स्थिति, लंबित मामलों का विवरण और प्रशासनिक अनुभव शामिल है। सूत्रों के अनुसार, UPSC की चयन समिति की बैठक अगले हफ्ते प्रस्तावित है, जिसमें पैनल शॉर्टलिस्टिंग पर चर्चा होगी।

बताया जा रहा है कि मौजूदा DGP के कार्यकाल और वैकल्पिक व्यवस्थाओं को देखते हुए सरकार समयबद्ध तरीके से प्रक्रिया पूरी करना चाहती है। UPSC की बैठक के बाद 3 अधिकारियों का पैनल तैयार होने की संभावना है, जिसमें से राज्य सरकार नाम चयन कर नियुक्ति का प्रस्ताव जारी करेगी।

पुलिस और प्रशासनिक हलकों में इसे नियमित प्रक्रिया बताया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि FIR से जुड़ी जानकारी मांगना एक मानक कदम है, ताकि चयन किसी भी विवाद से परे और नियमसम्मत रहे। अंतिम फैसला UPSC की अनुशंसा और राज्य सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा।

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