युवक बोला—बस में लटककर आया, फिर भी इलाज नहीं मिला; महेंद्रगढ़ में बच्ची का पोस्टमॉर्टम रुका
हरियाणा में डॉक्टरों की हड़ताल का दूसरा दिन भी मरीजों के लिए भारी संकट बनकर सामने आया। प्रदेशभर के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी, ऑपरेशन और कई जगह इमरजेंसी सेवाएं बाधित रहीं। इसका सबसे ज्यादा असर गरीब और दूरदराज से आने वाले मरीजों पर पड़ा, जिन्हें इलाज के लिए घंटों भटकना पड़ा।
हिसार में एक युवक ने बताया कि वह गंभीर हालत में बस की भीड़ में लटककर अस्पताल तक पहुंचा, लेकिन वहां डॉक्टरों की हड़ताल के कारण उसे समय पर इलाज नहीं मिल सका। युवक का कहना है कि वह सुबह से अस्पताल के चक्कर काट रहा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। उसके परिजन भी बेहद परेशान नजर आए और उन्होंने सरकार से तुरंत व्यवस्था बहाल करने की मांग की।
महेंद्रगढ़ में हालात और भी गंभीर हो गए, जहां एक मासूम बच्ची का पोस्टमॉर्टम डॉक्टरों की हड़ताल के कारण रुक गया। परिजनों का आरोप है कि शव को घंटों अस्पताल में रखा गया, लेकिन कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं हो पाया। इस कारण अंतिम संस्कार में भी देरी हुई, जिससे परिवार को मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ी।
अंबाला, करनाल, रोहतक, भिवानी और गुरुग्राम समेत कई जिलों में भी यही हालात देखने को मिले। मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ा, जहां महंगा इलाज उनकी पहुंच से बाहर साबित हुआ। कई जगह मेडिकल स्टाफ और नर्सों ने सीमित स्तर पर मरीजों को प्राथमिक सहायता दी, लेकिन डॉक्टरों के बिना इलाज संभव नहीं हो सका।
डॉक्टर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर हैं, जिनमें सुरक्षा व्यवस्था, सेवा शर्तों में सुधार और लंबित मांगों पर कार्रवाई शामिल है। सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। स्वास्थ्य विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था का दावा किया है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है।
मरीजों और उनके परिजन लगातार सरकार से अपील कर रहे हैं कि हड़ताल खत्म कर जल्द से जल्द स्वास्थ्य सेवाएं बहाल की जाएं, ताकि आमजन को राहत मिल सके।
![]()











