EDC-SIDC भुगतान लंबित होने पर लाइसेंस रोकने का निर्णय; हिस्सेदारी बदलकर बचने के रास्ते भी बंद
हरियाणा सरकार ने बाहरी विकास शुल्क (EDC) और बुनियादी ढांचा विकास शुल्क (SIDC) की लंबित रकम की वसूली को लेकर सख्त कदम उठाए हैं। अब जिन डेवलपर्स या कंपनियों पर 20 करोड़ रुपये से अधिक की देनदारी बकाया है, उन्हें नए प्रोजेक्ट के लिए लाइसेंस जारी नहीं किया जाएगा। इस निर्णय का उद्देश्य राजस्व वसूली को तेज करना और शहरी विकास परियोजनाओं में वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करना है।
सूत्रों के अनुसार, कई मामलों में देखा गया कि कुछ प्रमोटर बकाया भुगतान से बचने के लिए कंपनी की शेयरहोल्डिंग में बदलाव कर देते थे या नई इकाई बनाकर लाइसेंस लेने की कोशिश करते थे। सरकार ने ऐसी प्रक्रियाओं पर रोक लगाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब देनदार संस्थाओं से जुड़े निदेशकों और भागीदारों की पृष्ठभूमि की भी जांच की जाएगी, ताकि किसी प्रकार की तकनीकी खामी का लाभ न उठाया जा सके।
शहरी निकाय और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे लंबित मामलों की सूची तैयार कर कड़ी निगरानी रखें। जिन परियोजनाओं में भुगतान लंबित है, वहां नियमानुसार ब्याज और दंडात्मक प्रावधान भी लागू किए जाएंगे।
सरकार का मानना है कि इस कदम से रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी और समय पर शुल्क जमा कराने की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही, विकास कार्यों के लिए आवश्यक संसाधन भी सुनिश्चित हो सकेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह नीति सख्ती से लागू होती है तो राज्य में अधूरी परियोजनाओं की संख्या घट सकती है और खरीदारों का भरोसा भी मजबूत होगा।
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