गैस संकट से बदली रसोई की तस्वीर:

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Haryana Gas Shortage

समारोहों और ढाबों में वैकल्पिक साधनों का सहारा

हरियाणा में व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित होने का असर अब बड़े आयोजनों और खानपान से जुड़े व्यवसायों पर साफ दिखाई देने लगा है। खासकर पानीपत और आसपास के क्षेत्रों में कैटरिंग सेवाओं और ढाबों को खाना बनाने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं का सहारा लेना पड़ रहा है।

जानकारी के अनुसार, कई दिनों से कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित है। इसका सीधा असर शादी समारोहों और बड़े कार्यक्रमों में बनने वाले भोजन पर पड़ा है। कई कैटरर्स ने मजबूरी में लकड़ी के चूल्हों का सहारा लिया है, ताकि मेहमानों के लिए भोजन समय पर तैयार किया जा सके। बड़े कड़ाहों में पकने वाला खाना अब पारंपरिक तरीके से आग जलाकर बनाया जा रहा है।

पानीपत में कई शादी समारोहों के दौरान यही स्थिति देखने को मिली, जहां गैस की कमी के कारण रसोइयों को लकड़ी की भट्ठियों पर खाना पकाना पड़ा। इससे खाना बनाने की प्रक्रिया थोड़ी धीमी जरूर हो गई, लेकिन आयोजकों ने किसी तरह व्यवस्था संभाल ली।

इसी तरह, मुरथल के मशहूर ढाबों पर भी गैस संकट का असर पड़ा है। यहां के कई ढाबा संचालकों ने खाना बनाने के लिए इंडक्शन चूल्हों का इंतजाम किया है। कुछ जगहों पर लकड़ी और बिजली दोनों विकल्पों का उपयोग किया जा रहा है, ताकि ग्राहकों को किसी तरह की परेशानी न हो।

ढाबा संचालकों का कहना है कि कॉमर्शियल गैस की नियमित आपूर्ति नहीं होने से कारोबार प्रभावित हो रहा है। उनका कहना है कि यदि स्थिति जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में दिक्कत और बढ़ सकती है।

फिलहाल संबंधित एजेंसियों से गैस की आपूर्ति बहाल करने की मांग की जा रही है। कारोबारियों और आयोजकों को उम्मीद है कि जल्द ही सप्लाई सुचारु हो जाएगी और रसोई फिर से सामान्य तरीके से चलने लगेगी।

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