गुरुग्राम-नूंह क्षेत्र की 3 हजार एकड़ परियोजना पर अदालत की सख्त टिप्पणी
हरियाणा सरकार की अरावली क्षेत्र में प्रस्तावित जंगल सफारी परियोजना को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा है कि अरावली पर्वतमाला से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए। अदालत ने पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए परियोजना पर गंभीर सवाल उठाए।
यह परियोजना गुरुग्राम और नूंह जिलों में लगभग 3 हजार एकड़ क्षेत्र में विकसित किए जाने की योजना के तहत प्रस्तावित थी। सरकार का दावा था कि इससे पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। हालांकि पर्यावरणविदों और सामाजिक संगठनों ने आशंका जताई थी कि इस तरह की गतिविधियों से अरावली की पारिस्थितिकी पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि अरावली क्षेत्र पर्यावरणीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है और यहां किसी भी निर्माण गतिविधि से पहले व्यापक अध्ययन और संरक्षण उपाय अनिवार्य हैं। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि प्राकृतिक संरचनाओं को नुकसान पहुंचाने वाली परियोजनाओं को अनुमति देना भविष्य में गंभीर पर्यावरणीय संकट को जन्म दे सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अरावली पर्वतमाला राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लिए प्राकृतिक ढाल का काम करती है और प्रदूषण नियंत्रण, भूजल संरक्षण तथा जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में किसी भी विकास योजना को संतुलित दृष्टिकोण के साथ लागू करना आवश्यक है।
फिलहाल अदालत के निर्देशों के बाद परियोजना की प्रगति पर विराम लग गया है और राज्य सरकार को आगे की रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है।
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