उड़ती धूल पर केवल पानी का छिड़काव नाकाफी, विस्तृत एक्शन प्लान मांगा
खुखराना क्षेत्र में प्रदूषण की शिकायतों पर सख्त रुख अपनाते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि केवल सड़कों पर पानी का छिड़काव करना धूल नियंत्रण का पर्याप्त समाधान नहीं माना जा सकता।
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा उठाया गया कि क्षेत्र में उड़ती धूल और औद्योगिक गतिविधियों से होने वाले प्रदूषण के कारण स्थानीय निवासियों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। एनजीटी ने बोर्ड से छह सप्ताह के भीतर विस्तृत स्थिति रिपोर्ट, निगरानी तंत्र और दीर्घकालिक कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा है।
ट्रिब्यूनल ने यह भी पूछा है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए अब तक कौन-कौन से ठोस कदम उठाए गए हैं और उनका वास्तविक प्रभाव क्या रहा है। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित इकाइयों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पर्यावरण संरक्षण को लेकर एनजीटी ने दोहराया कि प्रदूषण नियंत्रण केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सतत और प्रभावी उपायों के माध्यम से लागू किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि निर्माण स्थलों पर कवरिंग, मैकेनिकल स्वीपिंग, ग्रीन बेल्ट विकसित करना और नियमित मॉनिटरिंग जैसे उपायों को सख्ती से लागू करना आवश्यक है।
इस आदेश के बाद संबंधित विभागों में हलचल तेज हो गई है। अब सभी की नजर छह सप्ताह बाद पेश की जाने वाली रिपोर्ट पर रहेगी, जिससे स्पष्ट होगा कि खुखराना क्षेत्र में प्रदूषण नियंत्रण के लिए कितनी गंभीरता से कदम उठाए गए हैं।
![]()











