सिफारिशों के दबाव पर सख्त रुख, बिजली विभाग के अफसर का दो टूक संदेश

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Haryana Power Department

नेताओं के फोन से तंग अधिकारी, कर्मचारियों को लिखा चेतावनी भरा पत्र

हरियाणा में सरकारी विभागों में सिफारिश और दबाव की संस्कृति एक बार फिर चर्चा में है। फतेहाबाद में बिजली निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस प्रवृत्ति से परेशान होकर कर्मचारियों को सख्त शब्दों में पत्र जारी किया है। पत्र में साफ कहा गया है कि यदि किसी कर्मचारी ने अपने निजी काम या विभागीय फैसलों के लिए किसी नेता से फोन करवाया, तो इसे अनुशासनहीनता माना जाएगा और संबंधित कर्मचारी पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

बताया जा रहा है कि बिजली विभाग में तबादलों, ड्यूटी बदलाव, शिकायतों के निपटारे और अन्य प्रशासनिक मामलों में लगातार सिफारिशों का दबाव बनाया जा रहा था। इससे न केवल विभागीय कामकाज प्रभावित हो रहा था, बल्कि अधिकारियों के लिए निष्पक्ष निर्णय लेना भी मुश्किल हो गया था। इसी पृष्ठभूमि में अधिकारी ने यह कड़ा कदम उठाया।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि विभागीय कार्य नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत ही किए जाएंगे। किसी भी प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारी ने कर्मचारियों को यह भी याद दिलाया कि वे एक अनुशासित सेवा का हिस्सा हैं और उन्हें सरकारी नियमों का पालन करना अनिवार्य है।

इस पत्र के सामने आने के बाद विभाग में हलचल मच गई है। कुछ कर्मचारी इसे सही कदम बता रहे हैं और मानते हैं कि इससे कामकाज में पारदर्शिता आएगी। वहीं कुछ का कहना है कि राजनीतिक दबाव से पूरी तरह बच पाना व्यावहारिक रूप से आसान नहीं है।

प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यह पत्र सिर्फ फतेहाबाद तक सीमित मामला नहीं है, बल्कि पूरे प्रदेश के सरकारी दफ्तरों की हकीकत को उजागर करता है। यदि ऐसे कदम लगातार उठाए जाएं, तो सिफारिश और दबाव की संस्कृति पर लगाम लग सकती है।

फिलहाल यह पत्र चर्चा का विषय बना हुआ है और यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे चलकर वास्तव में कितनी सख्ती से इन चेतावनियों को लागू किया जाता है।

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