अहम रिपोर्ट के बिना टैरिफ बढ़ोतरी, सुनवाई से पहले ही डिस्कॉम पर विवाद
हरियाणा में बिजली टैरिफ को लेकर सुनवाई से पहले ही बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। राज्य की डिस्कॉम कंपनियों पर आरोप है कि उन्होंने वोल्टेज और सर्विस कॉस्ट से जुड़ी अहम अध्ययन रिपोर्ट नियामक आयोग को उपलब्ध नहीं कराई, जबकि इसी बीच करीब 3000 करोड़ रुपये की टैरिफ बढ़ोतरी का प्रस्ताव लागू कर दिया गया। इस पूरे मामले पर 9 तारीख को अहम बैठक प्रस्तावित है, जिसमें सभी पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी।
जानकारी के अनुसार, बिजली दरों में बढ़ोतरी से पहले नियमानुसार डिस्कॉम को वोल्टेज स्तर और सेवा लागत (सर्विस कॉस्ट) का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत करना होता है। इसी आधार पर यह तय किया जाता है कि उपभोक्ताओं पर कितनी और किस तरह की दर वृद्धि का बोझ डाला जाए। लेकिन इस बार आरोप है कि यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई और बिना पूरी पारदर्शिता के टैरिफ बढ़ा दिया गया।
उपभोक्ता संगठनों और कुछ औद्योगिक प्रतिनिधियों ने इस पर कड़ा एतराज जताया है। उनका कहना है कि यदि अध्ययन रिपोर्ट सामने नहीं रखी गई, तो यह समझना मुश्किल है कि टैरिफ बढ़ोतरी वास्तव में जरूरी थी या नहीं। इससे आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ उद्योगों पर भी अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ेगा।
डिस्कॉम का पक्ष है कि टैरिफ बढ़ोतरी बढ़ती लागत, पावर परचेज खर्च और वितरण से जुड़े नुकसान की भरपाई के लिए जरूरी थी। हालांकि रिपोर्ट को लेकर उठे सवालों पर अभी तक स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। नियामक आयोग ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए सुनवाई तय की है।
9 तारीख को होने वाली बैठक में यह तय माना जा रहा है कि डिस्कॉम से रिपोर्ट मांगी जाएगी और प्रक्रिया में हुई कथित चूक पर जवाब तलब किया जाएगा। इस बैठक का असर भविष्य की बिजली दरों और टैरिफ नीति पर पड़ सकता है।
फिलहाल, इस विवाद ने हरियाणा में बिजली दरों, पारदर्शिता और नियामक व्यवस्था पर नई बहस छेड़ दी है। उपभोक्ताओं की नजरें अब आयोग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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