सर्वोत्तम धन है स्वास्थ्य : डॉ चक्रधर त्रिपाठी

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ओडिशा : स्वास्थ्य ही सर्वोत्तम धन है और स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है। इसलिए स्वास्थ्य रूपी धन की सुरक्षा के लिए हम सबको सदैव सचेष्ट रहना चाहिए। मंगलवार को ये बातें ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय कोरापुट के वीसी डॉ चक्रधर त्रिपाठी ने कहीं। वे विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय फिटनेस फेस्ट के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य रूपी धन जिसके पास है उसके लिए यह पृथ्वी स्वर्ग है, अन्यथा नरक से भी बदतर। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य की रक्षा के लिए हर मनुष्य को प्रयत्नशील रहना चाहिए। वहीं, कार्यक्रम के संकल्पक और मुख्य अतिथि स्वर्णिम खेल कूद विश्वविद्यालय, गुजरात के पूर्व कुलपति डॉ जतीन सोनी ने कहा कि अपने शरीर और मन को पूरी क्षमता के साथ संचालित करने का सामर्थ्य ही उत्तम स्वास्थ्य है। स्वस्थ व्यक्ति अपने आप को ही नहीं, औरों को भी लाभ पहुंचा सकता है। बिना किसी कृत्रिम साधन के जो सौंदर्य किसी के चेहरे पर खिलता है,वहीं स्वास्थ्य है। राष्ट्र कवि दिनकर ने शक्ति और सौंदर्य शीर्षक कविता में स्वास्थ्य को ही शक्ति का प्रतीक माना है।

तुम रजनी के चांद बनोगे,

या दिन के मार्तंड प्रखर।

एक बात है मुझे पूछनी,

फूल बनोगे या पत्थर।

तेल फुलेल कृम कंघी से,

नकली रूप सजाओगे,

या असली सौंदर्य लहू को,

आनन पर चमकाओगे।

इसी तरह विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए हिंदी के अतिथि प्राध्यापक डॉ जंगबहादुर पांडेय ने कहा कि मनुष्य के जीवन में चार प्रकार के सुख होते हैं उनमें सर्वोपरि सुख स्वस्थ काया है।

प्रथम सुख स्वस्थ काया,

दूजा सुख घर में माया।

तीजा सुख पुत्र आज्ञाकारी,

 चौथा सुख कहे में नारी।

कार्यक्रम में जैव विविधता विभाग के प्रो डा एसके पालिता ने कहा कि *महाभारत काल में महाराज पुरू ने अपने पिता ययाति को अपना यौवन देकर स्वास्थ्य के महत्व को स्थापित किया था-

परशुराम पितु आज्ञा राखी।

मारी मातु लोक सब साखी।

तनय जजातिहि जौवन देयऊ।

पितु आज्ञा अघ अजस न भयऊ।

अगर हम संसार के सुखों का वास्तविक उपभोग करना चाहते हैं,तो सबसे पहले हमें अपने स्वास्थ्य रूपी धन की रक्षा करनी होगी। स्वास्थ्य को किसी मूल्य पर खरीदा नहीं जा सकता। इसीलिए स्वास्थ्य की महिमा सभी कालो और सभी देशों में गाई गई है। स्वस्थ होना मनुष्य का सबसे महत्वपूर्ण वैशिष्ट्य है क्योंकि स्वस्थ मानव को सृष्टि का सर्वोत्तम श्रृंगार कहा गया है।इस अवसर पर उपस्थित रहकर जिन विद्वानों ने कार्यक्रम को सफल बनाया उनमें डॉ कपिल खेमेंदु ,डॉ नूपुर पट्टनायक, डॉ मानस मल्लिक, डॉ आदित्य मिश्रा, डॉ काकोली बनर्जी, डॉ आलोक बराल, डॉ रूद्राणी  मोहंती, डॉ दुलूमणि तालुकदार तथा अन्य के नाम शामिल हैं।इस अवसर पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन होगा।

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ओडिशा : स्वास्थ्य ही सर्वोत्तम धन है और स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है। इसलिए स्वास्थ्य रूपी धन की सुरक्षा के लिए हम सबको सदैव सचेष्ट रहना चाहिए। मंगलवार को ये बातें ओडिशा केंद्रीय विश्वविद्यालय कोरापुट के वीसी डॉ चक्रधर त्रिपाठी ने कहीं। वे विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय फिटनेस फेस्ट के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य रूपी धन जिसके पास है उसके लिए यह पृथ्वी स्वर्ग है, अन्यथा नरक से भी बदतर। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य की रक्षा के लिए हर मनुष्य को प्रयत्नशील रहना चाहिए। वहीं, कार्यक्रम के संकल्पक और मुख्य अतिथि स्वर्णिम खेल कूद विश्वविद्यालय, गुजरात के पूर्व कुलपति डॉ जतीन सोनी ने कहा कि अपने शरीर और मन को पूरी क्षमता के साथ संचालित करने का सामर्थ्य ही उत्तम स्वास्थ्य है। स्वस्थ व्यक्ति अपने आप को ही नहीं, औरों को भी लाभ पहुंचा सकता है। बिना किसी कृत्रिम साधन के जो सौंदर्य किसी के चेहरे पर खिलता है,वहीं स्वास्थ्य है। राष्ट्र कवि दिनकर ने शक्ति और सौंदर्य शीर्षक कविता में स्वास्थ्य को ही शक्ति का प्रतीक माना है।तुम रजनी के चांद बनोगे,या दिन के मार्तंड प्रखर।एक बात है मुझे पूछनी,फूल बनोगे या पत्थर।तेल फुलेल कृम कंघी से,नकली रूप सजाओगे,या असली सौंदर्य लहू को,आनन पर चमकाओगे।इसी तरह विशिष्ट अतिथि के रूप में बोलते हुए हिंदी के अतिथि प्राध्यापक डॉ जंगबहादुर पांडेय ने कहा कि मनुष्य के जीवन में चार प्रकार के सुख होते हैं उनमें सर्वोपरि सुख स्वस्थ काया है।प्रथम सुख स्वस्थ काया,दूजा सुख घर में माया।तीजा सुख पुत्र आज्ञाकारी, चौथा सुख कहे में नारी।कार्यक्रम में जैव विविधता विभाग के प्रो डा एसके पालिता ने कहा कि *महाभारत काल में महाराज पुरू ने अपने पिता ययाति को अपना यौवन देकर स्वास्थ्य के महत्व को स्थापित किया था-परशुराम पितु आज्ञा राखी।मारी मातु लोक सब साखी।तनय जजातिहि जौवन देयऊ।पितु आज्ञा अघ अजस न भयऊ।अगर हम संसार के सुखों का वास्तविक उपभोग करना चाहते हैं,तो सबसे पहले हमें अपने स्वास्थ्य रूपी धन की रक्षा करनी होगी। स्वास्थ्य को किसी मूल्य पर खरीदा नहीं जा सकता। इसीलिए स्वास्थ्य की महिमा सभी कालो और सभी देशों में गाई गई है। स्वस्थ होना मनुष्य का सबसे महत्वपूर्ण वैशिष्ट्य है क्योंकि स्वस्थ मानव को सृष्टि का सर्वोत्तम श्रृंगार कहा गया है।इस अवसर पर उपस्थित रहकर जिन विद्वानों ने कार्यक्रम को सफल बनाया उनमें डॉ कपिल खेमेंदु ,डॉ नूपुर पट्टनायक, डॉ मानस मल्लिक, डॉ आदित्य मिश्रा, डॉ काकोली बनर्जी, डॉ आलोक बराल, डॉ रूद्राणी  मोहंती, डॉ दुलूमणि तालुकदार तथा अन्य के नाम शामिल हैं।इस अवसर पर विविध कार्यक्रमों का आयोजन होगा।
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