हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, कैंट बोर्ड कर्मियों को वेतन में बराबरी का अधिकार

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High Court Order

बरसों की लड़ाई के बाद मिला इंसाफ, बकाया भुगतान पर भी कोर्ट सख्त

कैंट बोर्ड कर्मचारियों के लिए हाईकोर्ट से बड़ी राहत की खबर सामने आई है। अदालत ने स्पष्ट आदेश देते हुए कहा है कि समान कार्य करने वाले कर्मचारियों को समान वेतन दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि कर्मचारियों को उनका बकाया वेतन 6 प्रतिशत ब्याज के साथ अदा किया जाए। इस फैसले को कर्मचारियों के अधिकारों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

मामले की सुनवाई के दौरान कर्मचारियों की ओर से दलील दी गई कि वे वर्षों से नियमित कर्मचारियों की तरह ही काम कर रहे हैं, लेकिन उन्हें कम वेतन दिया जा रहा है। जबकि उनकी जिम्मेदारियां, ड्यूटी आवर और कार्य का स्वरूप पूरी तरह समान है। इसके बावजूद वेतन और भत्तों में भारी अंतर रखा गया, जो संविधान के समानता के अधिकार का उल्लंघन है।

हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कर्मचारियों के पक्ष में फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि यदि कार्य की प्रकृति और जिम्मेदारी समान है तो वेतन में भेदभाव नहीं किया जा सकता। अदालत ने इसे “समान काम, समान वेतन” के सिद्धांत का स्पष्ट उल्लंघन बताया। साथ ही यह भी कहा कि कर्मचारियों को लंबे समय तक उनका हक नहीं दिया गया, इसलिए बकाया राशि पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना भी जरूरी है।

फैसले के बाद कैंट बोर्ड कर्मचारियों में खुशी की लहर है। कर्मचारियों का कहना है कि यह निर्णय न सिर्फ आर्थिक राहत देगा, बल्कि भविष्य में होने वाले भेदभाव पर भी रोक लगाएगा। कर्मचारी संगठनों ने इसे न्याय की जीत बताया है और कहा है कि इससे अन्य विभागों के अस्थायी और अनुबंध कर्मियों को भी कानूनी लड़ाई लड़ने का हौसला मिलेगा।

कानूनी जानकारों के अनुसार यह फैसला नजीर के तौर पर काम करेगा और सरकारी व अर्ध-सरकारी संस्थानों में वेतन असमानता के मामलों पर असर डालेगा। अब संबंधित विभाग को तय समयसीमा में कर्मचारियों का वेतन पुनः निर्धारित कर बकाया राशि का भुगतान करना होगा।

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