हाईवे निर्माण के लिए पेट्रोल पंप ध्वस्त, मालिक ने मुआवजे की मांग की

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आर्बिट्रेटर का फैसला मालिक के पक्ष में, जमीन लौटाने की मांग उठी

हरियाणा के रेवाड़ी जिले में हाईवे निर्माण के लिए पेट्रोल पंप तोड़ने का विवाद सामने आया है। पंप के मालिक का आरोप है कि निर्माण के दौरान उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया, लेकिन उन्हें कोई मुआवजा नहीं दिया गया। उन्होंने न्याय पाने के लिए मामले को आर्बिट्रेशन के पास ले जाने का फैसला किया।

आर्बिट्रेटर ने मामले की सुनवाई के बाद पंप मालिक के पक्ष में फैसला सुनाया है। अधिकारी ने स्पष्ट किया कि पंप को बिना उचित मुआवजा दिए तोड़ा गया था और मालिक की जमीन को वापस लौटाना उचित है। अब मालिक ने भूमि के हस्तांतरण और मुआवजे की पूरी रकम की मांग की है।

मालिक का कहना है कि हाईवे निर्माण के दौरान अधिकारियों ने उनकी जमीन और पंप की इमारत को अधिग्रहित किया, लेकिन उसे नुकसान का कोई हर्जाना नहीं दिया गया। इस कदम से उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ और व्यवसाय भी प्रभावित हुआ। उन्होंने कहा कि न्याय मिलने के बाद ही उन्हें विश्वास होगा कि कानून और प्रशासनिक प्रक्रिया सही ढंग से काम कर रही है।

आर्बिट्रेटर के निर्णय में कहा गया कि हाईवे जैसे सार्वजनिक कार्य के लिए संपत्ति अधिग्रहित की जा सकती है, लेकिन इसके लिए उचित मुआवजा और प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है। यह फैसला अन्य प्रभावित व्यवसायियों और संपत्ति मालिकों के लिए भी मिसाल साबित हो सकता है।

स्थानीय प्रशासन ने अभी तक इस फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं दी है। हालांकि अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि उच्च स्तरीय दिशा-निर्देशों के अनुसार भूमि के पुनः हस्तांतरण और मुआवजा प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।

इस घटना ने यह दिखा दिया है कि सार्वजनिक कार्य और निजी संपत्ति के बीच संतुलन बनाए रखना कितना महत्वपूर्ण है। भविष्य में ऐसे मामलों में सभी पक्षों की सहमति और कानूनी प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होगा।

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