सरकारी कमेटी ने आरोप नकारे, महिला आयोग ने अपनी जांच के आधार पर जताई असहमति
हरियाणा के हिसार स्थित नर्सिंग कॉलेज से जुड़ा विवाद अब जांच रिपोर्टों के विरोधाभास में उलझ गया है। एक ओर राज्य सरकार द्वारा गठित जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में यौन शोषण के आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत न मिलने की बात कही है, वहीं दूसरी ओर महिला आयोग ने दावा किया है कि उन्होंने मौके पर जाकर स्वयं जांच की और छात्राओं के बयानों को गंभीर पाया।
सरकारी जांच कमेटी का कहना है कि कॉलेज परिसर, रिकॉर्ड और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच के दौरान ऐसे प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं मिले, जिनसे यौन शोषण के आरोपों की पुष्टि हो सके। कमेटी ने यह भी कहा कि कुछ शिकायतें आपसी विवाद या प्रशासनिक खामियों से जुड़ी हो सकती हैं, जिन पर अलग स्तर पर कार्रवाई की जरूरत है।
वहीं महिला आयोग की ओर से बयान जारी कर कहा गया है कि आयोग की टीम ने छात्राओं से व्यक्तिगत रूप से बातचीत की, हॉस्टल और कॉलेज परिसर का निरीक्षण किया और परिस्थितियों का आकलन किया। आयोग का दावा है कि छात्राओं ने जो बातें बताईं, वे गंभीर हैं और उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आयोग ने इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की सिफारिश की है।
दो अलग-अलग रिपोर्ट सामने आने के बाद यह मामला और संवेदनशील हो गया है। छात्राओं और उनके परिजनों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। उनका कहना है कि जब तक सच्चाई सामने नहीं आती और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका भरोसा बहाल नहीं होगा।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, सरकार अब दोनों रिपोर्टों का अध्ययन कर आगे की कार्रवाई पर निर्णय ले सकती है। संभव है कि मामले की दोबारा या उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सभी पक्षों की बात सामने आ सके और किसी तरह का संदेह न रहे।
यह मामला शिक्षा संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा, शिकायत निवारण व्यवस्था और जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े करता है।
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