HKRN कंडक्टर की बर्खास्तगी पर हंगामा, धरने के दौरान पुलिस ने किया डिटेन
हरियाणा के सिरसा जिले में हरियाणा कौशल रोजगार निगम (HKRN) के तहत कार्यरत एक कंडक्टर को भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना भारी पड़ गया। आरोप है कि विभागीय गड़बड़ियों और वेतन से जुड़ी अनियमितताओं को उजागर करने के बाद कंडक्टर को बर्खास्त कर दिया गया। इसके विरोध में जब कंडक्टर ने धरना शुरू किया, तो पुलिस ने उसे डिटेन कर लिया। इस घटना के बाद परिवहन विभाग और प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।
जानकारी के अनुसार, बर्खास्त किए गए कंडक्टर ने HKRN के तहत काम कर रहे कर्मचारियों के वेतन से पेड कटौती, समय पर भुगतान न होने और अन्य कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक रूप से उठाया था। कंडक्टर का आरोप है कि कर्मचारियों के अधिकारों की बात करना विभाग को नागवार गुजरा और इसी का नतीजा उसकी नौकरी से बर्खास्तगी के रूप में सामने आया।
नौकरी से हटाए जाने के बाद कंडक्टर ने सिरसा में धरना प्रदर्शन शुरू किया। उसका कहना था कि जब तक उसे न्याय नहीं मिलेगा और कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं होगा, तब तक वह शांत नहीं बैठेगा। हालांकि धरने के दौरान पुलिस ने हस्तक्षेप करते हुए उसे हिरासत में ले लिया। पुलिस का तर्क है कि धरना स्थल पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया।
इस कार्रवाई के बाद कर्मचारियों और सामाजिक संगठनों में रोष देखने को मिला। उनका कहना है कि अगर कोई कर्मचारी भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाता है और उसे इस तरह दबाया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। कई लोगों ने मांग की है कि कंडक्टर की बर्खास्तगी पर पुनर्विचार किया जाए और लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच हो।
वहीं प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि बर्खास्तगी नियमों के तहत की गई है और धरना बिना अनुमति के दिया जा रहा था। मामले में आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी बताई जा रही है।
यह मामला HKRN के तहत कार्यरत कर्मचारियों की कार्यशैली, अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर एक नई बहस को जन्म दे रहा है।
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