नीतीश की मुहिम सफल हुई तो 2024 में भाजपा का पत्ता साफ : शिवानंद तिवारी

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पटना : विपक्षी एकजुटता की मुहिम में लगे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मिल रही सफलता से राजद गदगद है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मिले समर्थन और आश्वासन से राजद के वरिष्ठ नेता शिवानंद तिवारी उत्साहित हैं। उन्होंने  कहा है कि ममता बनर्जी ने नीतीश को बड़ी जिम्मेदारी दी है। विपक्षी एकजुटता के लिए बिहार में बैठक बुलाने को कहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि असल चुनौती कांग्रेस के साथ टीएमसी, सपा और केसीआर को लाने की है। कांग्रेस ने भी पहल की है, ऐसे में सभी दलों को एकजुटता के लिए बड़ा दिल दिखाना होगा।उन्होंने कहा कि जितने भी विपक्षी दल हैं सभी को दिख रहा है कि नरेंद्र मोदी की सरकार संविधान को तार-तार कर रही है। केंद्र की मोदी सरकार को लोकतंत्र पर विश्वास नहीं है और संविधान ने जो बोलने का अधिकार दिया है उसे वह मानने को तैयार नहीं है। ऐसे में आने वाले लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराना बहुत ही जरूरी है। यही कारण  है कि नीतीश कुमार को बंगाल और यूपी में साकारात्मक जवाब मिला। भले ही ममता और अखिलेश भाजपा के विरोधी हैं, लेकिन कांग्रेस से भी उनके रिश्ते ठीक नहीं है, जब ये लोग तैयार हो गए तो यह काफी महत्वपूर्ण हैं। शिवानंद तिवारी ने कहा कि नीतीश कुमार ने विपक्ष को जोड़ने की मुहिम आज नहीं शुरू की है बल्कि इससे पहले भी वे विपक्ष के नेताओं से मुलाकात कर चुके हैं। नीतीश कह चुके हैं कि कांग्रेस पार्टी का केंद्र में होना जरूरी है, तभी कोई कारगर गठबंधन बन सकता है। ममता बनर्जी और अखिलेश यादव का जवाब बहुत ही स्वागत योग्य है। नीतीश पहले ही कह चुके हैं कि वे प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नहीं हैं और वे सिर्फ विपक्षी दलों को एकजुट करने में अपनी भूमिका निभाएंगे। देश को बचाने के लिए केंद्र में जो नफरत फैलाने वाली सरकार है उसे हटाना बेहद जरूरी है। तिवारी ने कहा कि भाजपा के लोग इतने बेचैन क्यों हैं, आने वाले समय में सबकुछ पता चल जाएगा। भाजपा के लोगों में बेचैनी है कि नीतीश और तेजस्वी जिस मुहिम में लगे हैं अगर वह मुहिम सफल हो गई तो 2024 में उनका पत्ता साफ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा के लोगों की हैसियत नहीं है कि जिस स्तर की राजनीति नीतीश और तेजस्वी कर रहे हैं, वहां तक पहुंच पाएं। सुशील मोदी जैसे नेता ने भी इस लेबल पर कभी काम नहीं किया है। भाजपा में जिनको उम्मीद नहीं थी कि उन्हें पद मिलेगा, उन्हें भी पद मिल गया है। पद मिलने के बाद अकबका गए हैं और भाजपा के नेताओं में बयान देने का कंपटीशन शुरू हो गया है।

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