जीवन में सफलता चाहिये तो वर्तमान में रहना सीखना होगा : पिनाकी मिश्रा

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दयानंद राय

प्रख्यात ज्योतिषाचार्य और आइटी प्रोफेशनल पिनाकी मिश्रा बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं। उनसे ज्योतिषशास्त्र की उपयोगिता और अध्यात्म के विविध पहलुओं पर न्यूज वाणी के प्रधान संपादक दयानंद राय ने लंबी बातचीत की। प्रस्तुत है उस बातचीत का संपादित अंश।

सवाल : जीवन में ज्योतिष शास्त्र की जरूरत क्यों है ?

जवाब : ज्योतिष शब्द ज्योति और ईश से मिलकर बना है। ज्योति यानी प्रकाश और ईश अर्थात मालिक। अर्थात, जो प्रकाश का रास्ता का रास्ता दिखाए, वही ज्योतिष शास्त्र है। किसी भी व्यक्ति की जीवन यात्रा में हर वक़्त अलग-अलग रास्ते सामने रहते हैं, ऐसे में व्यक्ति यह नहीं समझ पाता कि उसके लिए कौन सा मार्ग सुगम है और कौन सा मार्ग कष्टकर? यहीं पर ज्योतिष शास्त्र की उपयोगिता सामने आती है। ज्योतिष शास्त्र बिल्कुल एक टॉर्च की तरह उन मार्गों पर प्रकाश डाल कर, व्यक्ति को यह दिखलाता है कि कौन सा मार्ग उसके जीवन यात्रा में सुगम है और कौन सा कष्टकर। इस प्रकार ज्योतिष शास्त्र की सहायता से व्यक्ति सुगम मार्ग अपनाकर अपनी जीवन यात्रा को आसान और सफल बनाता है।

सवाल : मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या क्या है ?

जवाब : मनुष्य की सबसे बड़ी समस्या अज्ञात भय है। एक के अतिरिक्त दूसरे का उदय भय का कारण है। आंतरिक भय द्वंद को जन्म देता है और द्वंद व्यक्ति के वर्तमान कर्म को खंडित करता है। आंतरिक भय से युक्त व्यक्ति सफलता की दहलीज पर तो पहुंच सकता है, पर दहलीज़ को लांघ नहीं सकता।

सवाल : अज्ञात भय से मुक्ति कैसे मिल सकती है?

जवाब : संत परमहंस बाबा का कथन था निर्भर तब निर्भय। अर्थात भय से मुक्ति के लिए निर्भरता जरूरी है। चाहे यह निर्भरता महाशक्ति के प्रति हो या फिर अपने कर्म के प्रति। जितनी गहरी निर्भरता होगी उतनी ही बड़ी आत्मशक्ति होगी। इस आत्मशक्ति का विकास तभी संभव हो पाता है, जब व्यक्ति भय शून्य हो जाता है।

सवाल : क्या ईश्वरीय शक्ति जैसी कोई चीज है ?

जवाब : बिल्कुल है। इशिता शक्ति का विकास ही ईश्वर होना है। इशिता का अर्थ है, सब पर प्रभुत्व करने की शक्ति, नियंत्रण करने की क्षमता। यह शक्ति जिसमें रहती है, वह ईश्वर हो जाता है। साधना के बल पर मानव में भी इशिता शक्ति उतरती है, और वह मानव भी ईश्वर बन जाता है। इसी शक्ति के विकास के क्रम में समकालीन समाज उन्हें कुछ मान लेता है, फिर परिक्षणों के बल पर यह निर्णय देता है कि ये सामान्य व्यक्ति नहीं विशिष्ट हैं। फिर, परवर्ती युग उन्हें ईश्वर के अवतार के रूप में निश्चित करता है। इसी क्रम में राम, कृष्ण और बुद्ध भगवान के रूप में मान्य हैं।

सवाल : शक्ति की ऊपासना क्यों की जाती है?

जवाब : व्यक्ति स्वयं शक्ति का असीम भंडार है, और इन्हीं शक्तियों को केंद्रित और जागृत करने के लिए शक्ति की उपासना की जाती है। इसे समझने के लिए, आप बिजली के तार और बल्ब का उदाहरण ले सकते हैं। बिजली के तार में करंट है, पर दिखता नहीं। लेकिन जब इसे केंद्रित कर दिया जाता है, तब बल्ब के प्रकाश के रूप में यही करंट प्रत्यक्ष हो जाता है।

सवाल : कोई व्यक्ति अपने जीवन में सफल कैसे हो सकता है ?

जवाब : वर्तमान में स्थित व्यक्ति ही जीवन में सफल हो सकते हैं। भविष्य चिंतन व्यक्ति के कर्म को खंडित करता है, और खंडित कर्म ही असफलता का मूल कारण है। ध्यान रहे, बिना कारण के कोई कार्य नहीं होता। इसलिए कारण जितना स्पष्ट होगा, कर्म उतना ही ज्यादा सिद्ध होगा।

अध्यात्म तथा ज्योतिष की प्रसिद्ध विभूति पंडित भवभूति मिश्र के नवासे हैं पिनाकी मिश्रा

प्रख्यात एस्ट्रोलोजर पिनाकी मिश्रा एक शताब्दी से भी अधिक ज्योतिषीय परंपरा वाले घराने से संबंद्ध और अध्यात्म तथा ज्योतिष के प्रसिद्ध विभूति पं भवभूति मिश्र के नवासे हैं। कंप्यूटर इंजीनियरिंग में स्नातक पिनाकी मिश्र एक दक्ष आईटी प्रोफेशनल भी हैं, जिनके बनाये हुए कई सॉफ्टवेयर झारखंड सरकार की ओर से स्वीकृत किये जा चुके हैं। कई आईपीएस अधिकारियों ने इनकी पेशेवर क्षमता को देखते हुए इन्हें सम्मानित किया। भारतीय अध्यात्म और संत साहित्य पर समर्पित तथा पं भवभूति मिश्र की ओर से वर्ष 1959 में स्थापित सत प्रकाशन के संयोजक पिनाकी मिश्रा ही हैं। सत प्रकाशन पंडित भवभूति मिश्र की ओर से रचित संत-साहित्य का निःशुल्क प्रकाशन और वितरण करती है। अब तक सत प्रकाशन से 24 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित की जा चुकी हैं, जो झारखंड के तीन महा संतों पर आधारित हैं। ये संत हैं – लंगटा बाबा, खरगडीहा (समाधि वर्ष-1910), परमहंस बाबा, डोमचांच (समाधि वर्ष-1961) और पगला दादा, रांची (समाधि वर्ष–1963। पिनाकी मिश्र नवभारत टाइम्स, बोधि एप, इंस्टा एस्ट्रो,नी टाइम एस्ट्रो के पैनल एस्ट्रोलॉजर होने के साथ ही साथ भारत के प्रमुख मीडिया हाउस के लिए ज्योतिष तथा अध्यात्म से संबंधित विषयों के लिए नियमित लेखन का कार्य करते हैं।

 

 

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