संसद भवन के उद्घाटन के लिए मुर्मू को नजरअंदाज करना आदिवासियों का अपमान : ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस

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नयी दिल्ली : ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को मोदी सरकार पर नये संसद भवन के उद्घाटन के लिए देश की पहली महिला राष्ट्रपति को निमंत्रित नहीं कर आदिवासियों का ‘अपमान करने’ का आरोप लगाया और इस कदम के विरूद्ध 26 मई को देशव्यापी प्रदर्शन का ऐलान किया। यहां कांग्रेस मुख्यालय में ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस के प्रमुख शिवाजीराव मोघे ने कहा कि राष्ट्रपति के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नये संसद भवन का उद्घाटन लोकतंत्र का ‘अपमान’ है। मोघे ने कहा, ‘‘ पहली बार एक आदिवासी राष्ट्रपति तथा एक महिला राष्ट्रपति हैं। (प्रधानमंत्री द्वारा ) यह उद्घाटन आदिवासियों एवं महिलाओं का अपमान है। राष्ट्रपति संसद का महत्वपूर्ण अंग होते हैं क्योंकि यह राष्ट्रपति ही हैं जो संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हैं। यह राष्ट्रपति ही हैं जिन्हें संसद का उद्घाटन करना चाहिए।’’ कांग्रेस के तहत ऑल इंडिया आदिवासी कांग्रेस के प्रमुख मोघे ने कहा, ‘‘ मैं नहीं जानता कि क्या यह इसलिए हो रहा है क्योंकि हम आदिवासी हैं।’’सरकार पर मोघे का हमला ऐसे समय हो रहा है जब एक दिन पहले ही 20 विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नये संसद भवन के उद्घाटन का बहिष्कार करने की घोषणा की है।कांग्रेस, वाम दल, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी समेत 19 विपक्षी दलों ने संसद के नए भवन के उद्घाटन समारोह का बहिष्कार करने की घोषणा की और आरोप लगाया कि केंद्र की मौजूदा सरकार के तहत ‘‘संसद से लोकतंत्र की आत्मा को ही निकाल दिया गया है।’’ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी कहा कि संसद के नए भवन का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को करना चाहिए और अगर ऐसा नहीं होता है तो उनकी पार्टी उद्घाटन समारोह में शामिल नहीं होगी।मोघे ने कहा कि जब नये संसद परिसर का भूमि पूजन किया गया तब भी तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को अलग रखा गया । उन्होंने कहा, ‘‘ दोनों ही समय मोदी जी उद्घाटन के लिए आगे आये।’’कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार के इस कदम का मकसद पिछड़ा वर्गों का अपमान करना है क्योंकि वह आदिवासियों के खिलाफ है।उन्होंने कहा, ‘‘ कल हम देश के आदिवासियों एवं महिलाओं का अपमान करने के इस प्रयास के विरूद्ध प्रखंड, ग्राम एवं जिला स्तर पर राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन करेंगे… हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि राष्ट्रपति नये संसद भवन का उद्घाटन करें। अब भी समय है, प्रधानमंत्री को अपना विचार बदल लेना चाहिए और राष्ट्रपति को नये संसद भवन का उद्घाटन करने देना चाहिए।’’

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