इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट संपत्तियों पर सरकार का फैसला, शुल्क ढांचे में क्षेत्रवार अंतर
हरियाणा सरकार ने इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के प्लॉट मालिकों को बड़ी राहत देते हुए सेल डीड (रजिस्ट्री) कराने की समय सीमा बढ़ाने का निर्णय लिया है। लंबे समय से समयसीमा समाप्त होने के कारण परेशान चल रहे हजारों प्लॉट धारकों के लिए यह फैसला राहत भरा माना जा रहा है। सरकार के इस कदम से उन लोगों को फायदा मिलेगा, जो तकनीकी कारणों या दस्तावेजी अड़चनों के चलते तय समय में रजिस्ट्री नहीं करा पाए थे।
सरकारी आदेश के अनुसार, अब इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट की आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों की सेल डीड कराने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाएगा। हालांकि, यह राहत पूरी तरह निशुल्क नहीं होगी। तय अवधि बढ़ाने के बदले प्लॉट मालिकों को एक्सटेंशन फीस देनी होगी, जो अलग-अलग शहरों में अलग दर से लागू की गई है।
जानकारी के मुताबिक, गुरुग्राम, फरीदाबाद और मानेसर जैसे हाई-वैल्यू शहरी क्षेत्रों में एक्सटेंशन फीस अपेक्षाकृत अधिक रखी गई है। इन इलाकों में जमीन की कीमतें ज्यादा होने के कारण सरकार ने शुल्क भी उसी अनुपात में तय किया है। वहीं, अन्य जिलों और अपेक्षाकृत छोटे शहरों में यह फीस कम रखी गई है, ताकि आम प्लॉट धारकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
प्रॉपर्टी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से रियल एस्टेट से जुड़े कई पुराने मामले सुलझ सकेंगे। लंबे समय से बिना रजिस्ट्री के अटके प्लॉट अब कानूनी रूप से मालिकों के नाम हो सकेंगे, जिससे भविष्य में किसी तरह का विवाद या लेन-देन की समस्या नहीं रहेगी। साथ ही, सरकार को भी इससे राजस्व प्राप्त होगा।
इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के तहत विकसित कॉलोनियों में रहने वाले लोगों ने इस निर्णय का स्वागत किया है। उनका कहना है कि पहले समयसीमा खत्म होने के बाद रजिस्ट्री को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी, लेकिन अब स्पष्ट नीति आने से उन्हें राहत मिली है।
सरकार की ओर से यह भी संकेत दिए गए हैं कि तय की गई नई समयसीमा के बाद फिर से विस्तार मिलने की संभावना कम होगी। ऐसे में प्लॉट मालिकों को सलाह दी गई है कि वे निर्धारित अवधि के भीतर आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर सेल डीड करवा लें। यह फैसला शहरी संपत्ति प्रबंधन और पारदर्शिता की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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