भारत का इतिहास वीरता का रहा है लेकिन इसे जान-बूझकर दबा दिया गया: पीएम

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नयी दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि भारत अपनी विरासत का जश्न मनाकर और औपनिवेशिक काल के दौरान साजिश के तहत लिखे गए इतिहास के पन्नों में खोए अपने गुमनाम बहादुरों को याद करके अपनी पिछली गलतियों को सुधार रहा है। उन्होंने कहा कि भारत का इतिहास वीरता का रहा है लेकिन इसे जान-बूझकर दबा दिया गया जबकि जरूरत, आजादी के बाद भारत को गुलाम बनाने वाले विदेशियों के एजेंडे को बदलने की थी। उन्होंने कहा कि बोड़फूकन का जीवन देश के सामने उपस्थित कई वर्तमान चुनौतियों का डटकर सामना करने के साथ ही यह प्रेरणा भी देता है कि परिवारवाद, भाई-भतीजावाद नहीं, बल्कि देश सबसे बड़ा होना चाहिए। इससे पहले, प्रधानमंत्री ने बोड़फूकन की 400वीं जयंती के उपलक्ष्य में यहां लगाई गई प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। ज्ञात हो कि लचित बोड़फूकन के 400वें जयंती वर्ष समारोह का उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने इसी साल फरवरी में असम के जोरहाट में किया था।लचित बोड़फूकन असम के पूर्ववर्ती अहोम साम्राज्य में एक सेनापति थे। सरायघाट के 1671 के युद्ध में उनके नेतृत्व के लिए उन्हें जाना जाता है। इस युद्ध में औरंगजेब के नेतृत्व वाली मुगल सेना का असम पर कब्जा करने का प्रयास विफल कर दिया गया था। इस विजय की याद में असम में 24 नवंबर को लचित दिवस मनाया जाता है। सरायघाट का युद्ध गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी के तटों पर लड़ा गया था। इस अवसर पर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा, राज्यपाल जगदीश मुखी और केन्द्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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