महिला कैदियों के बच्चों के लिए नियमों में बदलाव, विभाग ने 2 साल तक बढ़ाई सीमा
हरियाणा की जेलों में बंद महिला कैदियों के बच्चों को लेकर सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब जेलों में बच्चे अपनी मां के साथ 8 वर्ष की आयु तक रह सकेंगे। पहले यह सीमा 6 वर्ष निर्धारित थी, जिसे अब विभाग द्वारा दो साल और बढ़ा दिया गया है। इस फैसले से उन बच्चों को राहत मिलेगी जो अब तक कम उम्र में ही मां से अलग कर दिए जाते थे।
जेल विभाग के अनुसार, राज्य की विभिन्न जेलों में इस समय कुल 816 महिला कैदी बंद हैं, जिनमें से 47 बच्चे अपनी माताओं के साथ जेल परिसर में रह रहे हैं। इन बच्चों की देखभाल, पोषण और शिक्षा से जुड़ी जिम्मेदारी भी जेल प्रशासन निभा रहा है। बच्चों के लिए अलग बैरक, पौष्टिक भोजन, स्वास्थ्य जांच और शुरुआती शिक्षा की व्यवस्था पहले से ही की जा रही है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। छह साल की आयु में बच्चे अपनी मां से अलग हो जाते थे, जिससे उन्हें मानसिक आघात झेलना पड़ता था। अब दो साल अतिरिक्त समय मिलने से बच्चों को मां का संरक्षण और भावनात्मक सहयोग अधिक समय तक मिल सकेगा।
जेलों में रहने वाले इन बच्चों के लिए समय-समय पर मेडिकल चेकअप, टीकाकरण और पोषण संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। कुछ जेलों में बच्चों के लिए आंगनबाड़ी जैसी सुविधाएं भी शुरू की गई हैं, ताकि उन्हें प्रारंभिक शिक्षा मिल सके।
हालांकि, 8 साल पूरे होने के बाद बच्चों को परिवार के किसी सदस्य या सरकारी संरक्षण में भेजा जाएगा। इस दौरान सामाजिक कल्याण विभाग और बाल संरक्षण इकाइयों की भी भूमिका तय की गई है, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित रह सके।
इस फैसले के बाद महिला कैदियों और सामाजिक संगठनों ने सरकार के कदम का स्वागत किया है। उनका कहना है कि यह निर्णय बच्चों के हित में है और इससे उनका बचपन कुछ हद तक सामान्य रह सकेगा।
![]()











