स्नैचिंग और चाकूबाजी केस में नाबालिग को राहत, सबूतों के अभाव में बरी

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Juvenile Acquitted

चंडीगढ़ जिला अदालत का फैसला, आरोपी की पहचान और संलिप्तता साबित नहीं हुई

चंडीगढ़ जिला अदालत ने स्नैचिंग और चाकू मारने के एक गंभीर मामले में नाबालिग आरोपी को बरी कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष आरोपी की पहचान और घटना में उसकी भूमिका को ठोस सबूतों के साथ साबित करने में असफल रहा। इसी आधार पर अदालत ने नाबालिग को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया।

यह मामला शहर में हुई एक स्नैचिंग की घटना से जुड़ा था, जिसमें पीड़ित से लूटपाट के दौरान चाकू से हमला किए जाने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने जांच के बाद एक नाबालिग को आरोपी बनाते हुए उसके खिलाफ मामला दर्ज किया था। आरोप था कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत में अभियोजन पक्ष ने गवाह और सबूत पेश किए, लेकिन वे आरोपी को सीधे तौर पर अपराध से जोड़ने में सफल नहीं हो सके। अदालत ने पाया कि पीड़ित और गवाहों के बयानों में विरोधाभास हैं और पहचान परेड की प्रक्रिया भी संदेह के घेरे में रही। इसके अलावा, कोई ठोस भौतिक साक्ष्य भी आरोपी के खिलाफ प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

अदालत ने यह भी कहा कि किसी व्यक्ति, विशेषकर नाबालिग को, केवल संदेह के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। कानून के तहत अपराध को संदेह से परे साबित करना जरूरी है, जो इस मामले में नहीं हो पाया। ऐसे में आरोपी को दोषमुक्त करना ही न्यायसंगत है।

फैसले के बाद आरोपी पक्ष ने राहत की सांस ली, जबकि यह निर्णय जांच एजेंसियों के लिए भी एक संदेश माना जा रहा है कि मामलों में पुख्ता सबूत और निष्पक्ष जांच कितनी जरूरी है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के फैसले न्याय प्रणाली में सबूतों की अहम भूमिका को रेखांकित करते हैं।

यह मामला यह भी दर्शाता है कि गंभीर अपराधों में भी अदालतें केवल तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर ही निर्णय लेती हैं, न कि आरोपों या आशंकाओं के आधार पर।

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