ब्रह्मसरोवर को मिलेगा नया स्वरूप, सरस्वती तीर्थ मॉडल में ऐतिहासिक झलक

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Kurukshetra Brahmasarovar

डेढ़ करोड़ की लागत से विकसित होगा ब्रह्मसरोवर मॉडल, 49 सदरियां और 7,000 साल पुरानी सभ्यता की मूर्तियां

कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक ब्रह्मसरोवर को अब एक नए पर्यटन और धार्मिक स्वरूप में संवारा जाएगा। राज्य सरकार ने डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से ब्रह्मसरोवर मॉडल विकसित करने का निर्णय लिया है, जिससे यह स्थान सरस्वती तीर्थ के रूप में अधिक आकर्षक और ज्ञानवर्धक बनेगा। यह परियोजना न केवल तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाजनक होगी, बल्कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व को भी उजागर करेगी।

परियोजना के तहत ब्रह्मसरोवर परिसर में कुल 49 सदरियां बनाई जाएंगी। इन सदरियों में सरस्वती नदी की सभ्यता और कुरुक्षेत्र क्षेत्र की ऐतिहासिक झलक को प्रदर्शित करने की योजना है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन सदरियों में रखी जाने वाली मूर्तियां और मॉडल लगभग 7,000 साल पुरानी सभ्यता का प्रतिनिधित्व करेंगी। इसका उद्देश्य पर्यटकों और विद्यार्थियों को प्राचीन संस्कृति और इतिहास के बारे में जागरूक करना है।

इस मॉडल में केवल मूर्तियां ही नहीं, बल्कि सरस्वती नदी के इतिहास, उसकी भौगोलिक स्थिति, धार्मिक महत्व और उस समय के सामाजिक-धार्मिक जीवन की जानकारी भी डिजिटल और भौतिक रूप में प्रस्तुत की जाएगी। इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाले मॉडलिंग और निर्माण तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, ताकि यह स्थायी और आकर्षक दोनों रूपों में पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने।

सरकार और पर्यटन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि ब्रह्मसरोवर का यह नवीनीकरण परियोजना न केवल तीर्थयात्रियों के लिए रोचक होगी, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा देने में भी मदद करेगी। इसके माध्यम से स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और आसपास के छोटे व्यापारिक केंद्रों को लाभ होगा।

यह परियोजना कुरुक्षेत्र को धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक दृष्टि से एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार ने कहा है कि जल्द से जल्द इस मॉडल का निर्माण पूरा कर जनता और तीर्थयात्रियों के लिए इसे खोलने का प्रयास किया जाएगा।

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