कांग्रेस नेता का आरोप: विदेशी मेहमानों से मिलवाने से रोकती है केंद्र सरकार

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Leader of Opposition

पुतिन के दौरे से पहले नेता प्रतिपक्ष ने परंपरा टूटने का आरोप लगाया

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि जब भी कोई विदेशी प्रतिनिधि आता है या वे स्वयं विदेश जाते हैं, सरकार यह सुनिश्चित करती है कि विपक्षी नेताओं से उनकी मुलाकात न कराई जाए — यह परंपरा अब पालन नहीं की जा रही। उन्होंने सीधे तौर पर कहा कि इसके पीछे केंद्र की ‘असुरक्षा’ कारण है और इस रवैये को लोकतांत्रिक तौर पर चिंताजनक बताया। यह टिप्पणी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत दौरे से कुछ घंटे पहले सामने आई।

केंद्र ने राहुल के दावे का तुरंत जवाब दिया और कहा कि इस तरह के मामलों में कई बार प्रतिनिधि मंडल या मेहमानों के अपने प्रतिनिधियों की सलाह व प्राथमिकता होती है; सरकार के दायरे में हर बात नहीं आती। कुछ सरकारी स्रोतों ने कहा कि ‘delegation discretion’ के कारण मिलने-जुलने के विषय पर निर्णय होते हैं और यह नियमावलियां समय-समय पर लागू होती हैं। विपक्ष और केंद्र के बीच इस मुद्दे पर तीखी बयानबाजी देखी गयी।

राजनीतिक हलकों में यह बहस सिर्फ औपचारिक मुलाकातों तक सीमित नहीं रही — कई विश्लेषक इसे प्रतिनिधि लोकतंत्र की परंपराओं और शासकीय पारदर्शिता पर उठते प्रश्नों के रूप में देख रहे हैं। केंद्र की ओर से आलोचनात्मक प्रतिक्रियाएँ भी आईं, जिनमें कहा गया कि ऐसे बयान ‘अनुचित’ और ‘गलत’ हैं, जबकि विपक्ष ने यह कहकर पलटवार किया कि परंपराओं का सम्मान होना चाहिए।

यह विवाद तब उभरा जब पुतिन का दौरा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों रूप से संवेदी विषय बन गया — ऐसे समय में विरोधी नेताओं के साथ संवाद और पारंपरिक राजनयिक व्यवहार पर उठते सवाल, राजनीति में और गरमाहट पैदा कर रहे हैं। भविष्य में इस मुद्दे पर संसद में और बहस होने की संभावना है और दोनों पक्षों की अगली टिप्पणियाँ इसे और आगे लेकर जा सकती हैं।

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