हिसार से उठी विरोध की आवाज
देश की रेल सेवा की रीढ़ माने जाने वाले लोको पायलेट आज गंभीर मानसिक और शारीरिक दबाव से गुजर रहे हैं। कार्य परिस्थितियों में सुधार और सुरक्षित ड्यूटी समय की मांग को लेकर देशभर में रोष बढ़ता जा रहा है। हरियाणा के हिसार में इसका प्रत्यक्ष उदाहरण देखने को मिल रहा है, जहां लोको पायलेट 48 घंटे से उपवास पर बैठे हैं। उनका आरोप है कि उन्हें न तो समय पर भोजन मिलता है और न ही पर्याप्त आराम, इसके बावजूद उनसे लगातार 12 से 14 घंटे तक ट्रेन चलाने की ड्यूटी ली जा रही है।
आंदोलन कर रहे लोको पायलेट्स का कहना है कि लंबे समय तक बिना विश्राम ड्यूटी कराने से न केवल उनके स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ सकती है। उनका दावा है कि कई बार रात और दिन की ड्यूटी के बीच न्यूनतम रेस्ट भी नहीं दिया जाता, जिससे थकान हावी रहती है। इसके बावजूद उन पर समय पर ट्रेन संचालन का दबाव बना रहता है।
हिसार में उपवास पर बैठे लोको पायलेट्स ने रेलवे प्रशासन के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे टकराव नहीं चाहते, लेकिन अपने अधिकारों और यात्रियों की सुरक्षा के लिए यह कदम उठाना जरूरी हो गया है। उन्होंने मांग की है कि ड्यूटी घंटों की सीमा सुनिश्चित की जाए, समयबद्ध रेस्ट दिया जाए और स्टाफ की कमी को जल्द पूरा किया जाए।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि वे कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से ले रहे हैं और समाधान की दिशा में बातचीत की जा रही है। हालांकि अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका है, जिससे कर्मचारियों में नाराजगी बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोको पायलेट्स की थकान और कार्यभार पर ध्यान नहीं दिया गया तो इसका सीधा असर रेल सुरक्षा पर पड़ सकता है। ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि प्रशासन और कर्मचारी संगठनों के बीच समाधान निकालकर इस संवेदनशील मुद्दे का स्थायी हल किया जाए।
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