आदिवासियों के मसीहा थे भगवान बिरसा मुंडा : लक्ष्मीनारायण मुंडा

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रांची। राष्ट्रीय आदिवासी मुंडा परिषद और कांके रोड सरना समिति के पदाधिकारियों ने मंगलवार को कांके स्थित बिरसा एग्रीकल्चर यूनिवसिर्टी में भगवान बिरसा मुंडा की 147वीं जयंती मनायी।मौके पर राष्ट्रीय आदिवासी मुंडा परिषद के संचालक लक्ष्मीनारायण मुंडा ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने बहुत कम उम्र में आदिवासी समाज में अपनी एक अलग पहचान बनायी थी। यह उनके पराक्रम का ही प्रतिफल था कि ब्रिटिश हुकूमत को उनके सामने झुकना पड़ा और सीएनटी एक्ट का कानून लागू किया गया। वे आदिवासियों के मसीहा थे। वहीं, संचालन समिति के आनंद मुंडा ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा ने जल, जंगल और जमीन को बचाने के लिए आदिवासियों में एकता स्थापित करने का काम किया। इसी तरह कांके रोड सरना समिति के डब्लू मुंडा ने कहा की भगवान बिरसा मुंडा का नारा अबुआ दिसुम अबुआ राज आज भी आदिवासी समाज को एक सूत्र में बांधने के लिए काफी है। कार्यक्रम में लक्ष्मीनारायण मुंडा, आनन्द मुंडा, डब्लू मुंडा, दिनेश मुंडा,राज कुमार मुंडा, विकास टोप्पो, सुनील मुंडा, विजय मुंडा, सुमित तिर्की, विजय मुंडा, दिनेश मुंडा, मनोज नागवंशी, मुकेश पाहन तथा कई अन्य मौजूद थे।

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