वार्ड सीमांकन और मतदान प्रणाली को लेकर विवाद, तीन जिलों में अटकी चुनावी प्रक्रिया
नगर निगम चुनाव को लेकर आज हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं। यह मामला वार्डबंदी और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के साथ वीवीपैट जोड़ने से जुड़ा है, जिस पर अंतिम निर्णय चुनावी प्रक्रिया की दिशा तय कर सकता है।
बताया जा रहा है कि वार्डों के पुनर्गठन को लेकर कुछ पक्षों ने आपत्ति जताई थी। उनका कहना है कि वार्डबंदी में पारदर्शिता और संतुलन का अभाव है, जिससे चुनावी निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। इसी के चलते मामला कोर्ट पहुंचा और अब इस पर सुनवाई होनी है।
दूसरा अहम मुद्दा मतदान प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसमें EVM के साथ VVPAT (वोटर वेरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल) को अनिवार्य रूप से जोड़ने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इससे मतदान प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनेगी।
इन दोनों मुद्दों के चलते तीन जिलों में नगर निगम चुनाव फिलहाल अटके हुए हैं। प्रशासन और चुनाव आयोग इस मामले में कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं, ताकि आगे की प्रक्रिया तय की जा सके।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि कोर्ट का फैसला न केवल इन जिलों के चुनावों पर असर डालेगा, बल्कि भविष्य में होने वाले चुनावों के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण साबित हो सकता है।
फिलहाल, सभी पक्ष अपनी-अपनी दलीलें पेश करने की तैयारी में हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अदालत इस संवेदनशील मामले में क्या रुख अपनाती है और क्या चुनावी प्रक्रिया को हरी झंडी मिल पाती है या नहीं।
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