बिहार में नगर निकाय चुनावों पर फिर लगा ग्रहण

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महेश कुमार सिन्हापटना । बिहार में नगर निकाय चुनाव पर एक बार फिर ग्रहण लग गया है। क्योंकि नगर निकाय चुनाव में पिछड़ों को आरक्षण के लिए रिपोर्ट तैयार करने वाले बिहार राज्य अति पिछड़ा वर्ग आयोग पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। ऐसे में नगर निकाय चुनाव में फिर पेंच फंस गया है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राज्य की महागठबंधन सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। उधर, कोर्ट के फैसले के बाद अब भाजपा फिर से नीतीश सरकार पर हमलावर हो गई है। भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने बुधवार को ट्विट कर कोर्ट के आदेश की प्रति शेयर की है। साथ ही मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा है कि एक बार फिर नीतीश कुमार का अति पिछड़ा विरोधी चेहरा उजागर हो गया है। उन्होंने कहा कि पहले आयोग के गठन में टालमटोल किया गया और करोड़ों रुपए वकीलों पर खर्च किए गए। फिर हाईकोर्ट के दबाव पर नवीन कुमार की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया गया। आयोग के काम के लिए बड़ी राशि मंजूर की गई। लेकिन अब आयोग पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। गौरतलब है कि बिहार में नगर निकाय चुनाव को स्थगित करने के बाद बिहार सरकार ने हाई कोर्ट का रुख किया था। वहां कोर्ट के आदेश के बाद 18 अक्टूबर को राज्य की सरकार ने पिछड़ा आयोग के लिए कमीशन का गठन किया था। इसकी रिपोर्ट सौंपने के बाद ही चुनाव कराए जाने की उम्मीद थी। जबकि भाजपा शुरू से ही सरकार की ओर से गठित आयोग का विरोध करती रही है और चुनाव में अति पिछड़ा आरक्षण को लेकर दूसरे कमीशन की मांग करती रही है। लेकिन सरकार ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी यह मान लिया है कि बिहार सरकार की ओर से गठित आयोग में नियमों का पालन नहीं किया गया है।

महेश कुमार सिन्हा

पटना । बिहार में नगर निकाय चुनाव पर एक बार फिर ग्रहण लग गया है। क्योंकि नगर निकाय चुनाव में पिछड़ों को आरक्षण के लिए रिपोर्ट तैयार करने वाले बिहार राज्य अति पिछड़ा वर्ग आयोग पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। ऐसे में नगर निकाय चुनाव में फिर पेंच फंस गया है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला राज्य की महागठबंधन सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। उधर, कोर्ट के फैसले के बाद अब भाजपा फिर से नीतीश सरकार पर हमलावर हो गई है। भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने बुधवार को ट्विट कर कोर्ट के आदेश की प्रति शेयर की है। साथ ही मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा है कि एक बार फिर नीतीश कुमार का अति पिछड़ा विरोधी चेहरा उजागर हो गया है। उन्होंने कहा कि पहले आयोग के गठन में टालमटोल किया गया और करोड़ों रुपए वकीलों पर खर्च किए गए। फिर हाईकोर्ट के दबाव पर नवीन कुमार की अध्यक्षता में आयोग का गठन किया गया। आयोग के काम के लिए बड़ी राशि मंजूर की गई। लेकिन अब आयोग पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। गौरतलब है कि बिहार में नगर निकाय चुनाव को स्थगित करने के बाद बिहार सरकार ने हाई कोर्ट का रुख किया था। वहां कोर्ट के आदेश के बाद 18 अक्टूबर को राज्य की सरकार ने पिछड़ा आयोग के लिए कमीशन का गठन किया था। इसकी रिपोर्ट सौंपने के बाद ही चुनाव कराए जाने की उम्मीद थी। जबकि भाजपा शुरू से ही सरकार की ओर से गठित आयोग का विरोध करती रही है और चुनाव में अति पिछड़ा आरक्षण को लेकर दूसरे कमीशन की मांग करती रही है। लेकिन सरकार ने इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी यह मान लिया है कि बिहार सरकार की ओर से गठित आयोग में नियमों का पालन नहीं किया गया है।

लेखक : न्यूजवाणी के बिहार के प्रधान संपादक हैं और यूएनआई के ब्यूरो चीफ रह चुके हैं

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