पंजाब में बढ़ती सक्रियता के पीछे सियासी रणनीति, नए समीकरण साधने की कोशिश

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Nayab Singh Saini

नायब सैनी की पंजाब में सक्रियता के मायने, सामाजिक संतुलन और भावनात्मक संदेश

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की हालिया पंजाब दौरों ने सियासी हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। सवाल उठ रहा है कि आखिर वे पड़ोसी राज्य में इतनी सक्रियता क्यों दिखा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसके पीछे बहुस्तरीय रणनीति काम कर रही है।

पंजाब की राजनीति लंबे समय से जट्ट सिख नेतृत्व के प्रभाव में रही है। ऐसे में अन्य सामाजिक वर्गों, खासकर पिछड़े वर्ग (OBC) के बीच नई पैठ बनाने की कोशिश को एक अहम कदम माना जा रहा है। सैनी स्वयं पिछड़े वर्ग से आते हैं, इसलिए उनकी मौजूदगी को सामाजिक प्रतिनिधित्व के संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है। इससे एक वैकल्पिक नेतृत्व का संकेत देने की कोशिश समझी जा रही है।

इसके साथ ही धार्मिक और पंथक भावनाओं से जुड़ाव का प्रयास भी नजर आता है। सिख गुरुओं और ऐतिहासिक स्थलों के संदर्भ में भावनात्मक जुड़ाव स्थापित कर व्यापक समाज को संदेश देने की रणनीति अपनाई जा रही है। यह कदम केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक संपर्क बढ़ाने की दिशा में भी माना जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पड़ोसी राज्यों में प्रभाव बढ़ाना किसी भी दल के लिए दीर्घकालिक विस्तार की योजना का हिस्सा होता है। पंजाब में नई सामाजिक ध्रुवीकरण की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह सक्रियता भविष्य की तैयारी के रूप में भी देखी जा रही है।

हालांकि विपक्ष इसे महज राजनीतिक महत्वाकांक्षा से जोड़कर देख रहा है, लेकिन समर्थकों का तर्क है कि क्षेत्रीय सहयोग और सामाजिक समरसता बढ़ाने के लिए संवाद जरूरी है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि यह सक्रियता किस हद तक राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करती है।

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