राहुल प्रकरण पर नीतीश ने कहा कि यह कोर्ट का मामला है और ऐसे मामलों में वे कभी कुछ नहीं  बोलते

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पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को कोर्ट से मिली सजा और संसद सदस्यता समाप्त किए जाने को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि यह सब तो कोर्ट का मामला है और इस मामले पर मैं कभी भी कुछ भी नहीं बोलता हूं। मुख्यमंत्री ने बुधवार को कहा कि 17 साल से सरकार चला रहा हूं। कई केस होते हैं। लेकिन कोर्ट के फैसले पर कभी कोई टिप्पणी नहीं की और आगे भी कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। हमारी पार्टी के लोग तो इस मसले पर अपना जवाब और पार्टी की बात रख ही रहे हैं। उससे अधिक इसमें क्या बोलना है। बाकी क्या हो रहा है, हम सबकुछ देख रहे हैं। सम्राट अशोक की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे नीतीश कुमार ने कहा कि हम जब से राजनीति में हैं, हमने कभी कोर्ट के बारे में कोई कमेंट नहीं किया है। अगर किसी पर मुकदमा होता है तो भी उस पर हम कमेंट नहीं करते। मेरी आदत है कि इन चीजों पर हम कमेंट नहीं करते हैं, जो कुछ भी होगा सब लोग मिलकर के उसके बारे में विचार करेंगे। अगर हाई कोर्ट से कोई फैसला आता है तो सबको अधिकार है ना सुप्रीम कोर्ट में जाने का। वैसे हम 17 साल से सरकार चला रहे हैं और तब से लेकर आजतक किसी की जांच होती है तो उसमें हम इंटरफेरेंस नहीं करते हैं। उनसे एक बार फिर से जब विपक्षी एकजुटता को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि विपक्ष के लोगों में अधिक से अधिक एकता हो, यही मेरी इच्छा है और हम इंतजार कर रहे हैं। ज्यादा से ज्यादा लोग एकजुट हो जाएंगे तो थोड़ा मजबूती के साथ 2024 का लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे। यही वजह है कि हम अभी चुपचाप बैठे हुए हैं। दिल्ली में हम दो राउंड गए सभी लोगों से बातचीत हुई। अब हम उनलोगों के जवाब का  इंतजार कर रहे हैं। इसको लेकर हम कांग्रेस के लोगों को भी कह दिया है कि आप तय कर लीजिए । आपको अन्य लोगों के साथ मिलकर काम करना है तो हमलोग इंतजार कर रहे हैं। बिहार भाजपा में बदलाव के सवाल पर नीतीश कुमार ने कहा कि उनसे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है। उन्होंने कहा कि शुरू में वो(सम्राट चौधरी) हमारे साथ थे। उनको हमने क्या कुछ नहीं दिया? उसके बाद भी वो भाग गए। उनका काम ही इधर-उधर करते रहना है। इसलिए उनसे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है। इसके साथ ही उपेंद्र कुशवाहा को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि शुरू में वो भी हमारे साथ थे तो उनको क्या से क्या बनाया। बावजूद इसके वो भाग गए, उसके बाद भी उनको वापस लाकर राज्यसभा भेजे। ये तो उनकी एक आदत सी बन गयी  है। इसलिए अब उनसे कोई फर्क नहीं पड़ता है। नीतीश कुमार ने कहा कि हम काम करते हैं। हम किसी को नहीं कहते कि हमें ही वोट दीजिए। इस दौरान नीतीश कुमार ने अपने राजनीतिक दर्द को साझा करते हुए कहा कि हम काम में विश्वास करते हैं, लेकिन हमारी बात मीडिया में नहीं आती। वो (भाजपा) काम नहीं करते फिर भी उन्हीं का चलता है। फिर से कहा कि हम काम करते हैं वो खबर नहीं छपती है। कोई साथ आता है फिर भागता है, फिर तरह तरह की बात करता है, इसका कोई मतलब है? हम लोग रोज देखते हैं। बिहार में कितना काम करते हैं, वह खबर नहीं रहता है। जो हमारे खिलाफ में बोलता है तो वह खूब छपता है। इसका क्या मतलब है? हम तो हंसते रहते हैं। खिलाफ में खबर छपने से हमको कोई तकलीफ नहीं है। वह (भाजपा नेता) जो बोलेंगे उनको खूब पब्लिसिटी मिलेगी। हमको क्या जरूरत है, कुछ बोलने की? उन्हें (केंद्र सरकार) जो मतलब है करें, लेकिन कोई काम नहीं हो रहा है, सिर्फ प्रचार हो रहा है।

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