ओवैसी के उम्मीदवार ने कुढ़नी में बढ़ाई महागठबंधन की चिंता

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महेश कुमार सिन्हापटना। बिहार के कुढ़नी विधानसभा  उपचुनाव को लेकर एक तरफ जहां महागठबंधन पूरा दमखम लगा रहा है, वहीं असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने सबकी नींद हराम कर दी है। एआईएमआईएम ने कुढ़नी में अपना दमदार उम्मीदवार गुलाम मुर्तजा अंसारी को मैदान में उतार दिया है। इससे महागठबंधन के नेताओं की चिंता बढ़ गई है। उन्हें कुढ़नी में भी गोपालगंज जैसा हश्र होने का डर सताने लगा है। महागठबंधन के नेता लगातार दौरा कर माय (एम-वाई) समीकरण को साधने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अल्पसंख्यक वोट बैंक में बिखराव का डर अंदर से हिला रहा है।अंसारी जिला पार्षद  रह चुके हैं और क्षेत्र में अपने समाज के बीच  उनका अच्छा-खासा प्रभाव है। जबकि महागठबंधन के उम्मीदवार जदयू  के मनोज कुशवाहा ज्यादा लोकप्रिय नेता नहीं रहे हैं। हालांकि वह 2015 के चुनाव में कुढ़नी से लड़े थे। उस चुनाव में वह भाजपा के केदार प्रसाद गुप्ता  से 11 हजार से अधिक वोटों से हार गये थे।साल 2020  के चुनाव में कुढ़नी सीट से एआईएमआईएम नहीं लड़ी थी। तब राजद के अनिल सहनी ने मामूली वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। उन्होंने भाजपा के केदार प्रसाद गुप्ता को हराया था। जबकि साल 2020 में भाजपा और जदयू एक साथ गठबंधन में थी। ऐसे में कहा जा रहा है कि एआईएमआईएम महागठबंधन के वोट बैंक में सेंध लगाएगी। हाल ही में गोपालगंज में हुए उप चुनाव में एआईएमआईएम के उम्मीदवार अब्दुल सलाम को 12,214 वोट मिले थे, जिसने महागठबंधन का खेल बिगाड़ दिया था और उसके उम्मीदवार 1700  वोटों से हार गये थे। ऐसे में माना जा रहा है कि आईएमआईएम के उम्मीदवार होने से अल्पसंख्यक वोटों का बिखराव होना ही है। जाहिर है इसका फायदा  भाजपा को होगा।  इससे आशंकित महागठबंधन के नेताओं ने यहां अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।  उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने बुधवार को वंहा अपने दल बल के साथ चुनाव प्रचार किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार  शुक्रवार को यहां चुनावी सभा को संबोधित करने वाले हैं। बताया जा रहा है कि जदयू की नजर जहां राजद के वोट बैंक मुस्लिम, यादव सहित पिछड़ों और वाम कैडरों पर है, वहीं भाजपा सवर्ण और अति पिछड़ों तथा वैश्य वोटरों के जरिए चुनावी वैतरणी पार करने की जुगाड़ में है।उधर यह भी कहा जा रहा है कि वीआईपी उम्मीदवार  नीलाभ कुमार सहनी और निषादों के अलावा अपने प्रभाव से सवर्ण मतदाताओं को आकर्षित कर सकते हैं। लेकिन कुढ़नी में अल्पसंख्यक वोट बैंक में बिखराव ना हो इसे लेकर राजद और जदयू दोनों मेहनत कर रहे हैं और लोगों को एआईएमआईएम को भाजपा का बी टीम बताकर निशाना साधने की कोशिश कर रहे हैं। तेजस्वी यादव ने बुधवार को कुढ़नी के तुर्की में जनसभा करते हुए बताया कि ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है।यदि लोगों को लगता है कि दोनों अलग हैं तो ऐसा नहीं है। तेजस्वी ने कहा कि एआईएमआईएम की पार्टी आखिर अपने गढ़ हैदराबाद में होने वाले उपचुनाव में क्यों नहीं लड़ रही है? ओवैसी की पार्टी हैदराबाद के साथ तेलांगना और आंध्र कहीं भी उपचुनाव में नहीं लड़ रही फिर बिहार में हो रहे उपचुनाव में क्यों लड़ रही है? यह समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भाजपा ओवैसी के साथ मिलकर अल्पसंख्यक वोट के बिखराव की राजनीति कर रही है ताकि, गठबंधन को नुकसान हो। लोगों को एआईएमआईएम को सबक सिखाना चाहिए।

महेश कुमार सिन्हा

पटना। बिहार के कुढ़नी विधानसभा  उपचुनाव को लेकर एक तरफ जहां महागठबंधन पूरा दमखम लगा रहा है, वहीं असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने सबकी नींद हराम कर दी है। एआईएमआईएम ने कुढ़नी में अपना दमदार उम्मीदवार गुलाम मुर्तजा अंसारी को मैदान में उतार दिया है। इससे महागठबंधन के नेताओं की चिंता बढ़ गई है। उन्हें कुढ़नी में भी गोपालगंज जैसा हश्र होने का डर सताने लगा है। महागठबंधन के नेता लगातार दौरा कर माय (एम-वाई) समीकरण को साधने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन उन्हें अल्पसंख्यक वोट बैंक में बिखराव का डर अंदर से हिला रहा है।अंसारी जिला पार्षद  रह चुके हैं और क्षेत्र में अपने समाज के बीच  उनका अच्छा-खासा प्रभाव है। जबकि महागठबंधन के उम्मीदवार जदयू  के मनोज कुशवाहा ज्यादा लोकप्रिय नेता नहीं रहे हैं। हालांकि वह 2015 के चुनाव में कुढ़नी से लड़े थे। उस चुनाव में वह भाजपा के केदार प्रसाद गुप्ता  से 11 हजार से अधिक वोटों से हार गये थे।साल 2020  के चुनाव में कुढ़नी सीट से एआईएमआईएम नहीं लड़ी थी। तब राजद के अनिल सहनी ने मामूली वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। उन्होंने भाजपा के केदार प्रसाद गुप्ता को हराया था। जबकि साल 2020 में भाजपा और जदयू एक साथ गठबंधन में थी। ऐसे में कहा जा रहा है कि एआईएमआईएम महागठबंधन के वोट बैंक में सेंध लगाएगी। हाल ही में गोपालगंज में हुए उप चुनाव में एआईएमआईएम के उम्मीदवार अब्दुल सलाम को 12,214 वोट मिले थे, जिसने महागठबंधन का खेल बिगाड़ दिया था और उसके उम्मीदवार 1700  वोटों से हार गये थे। ऐसे में माना जा रहा है कि आईएमआईएम के उम्मीदवार होने से अल्पसंख्यक वोटों का बिखराव होना ही है। जाहिर है इसका फायदा  भाजपा को होगा।  इससे आशंकित महागठबंधन के नेताओं ने यहां अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।  उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने बुधवार को वंहा अपने दल बल के साथ चुनाव प्रचार किया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार  शुक्रवार को यहां चुनावी सभा को संबोधित करने वाले हैं। बताया जा रहा है कि जदयू की नजर जहां राजद के वोट बैंक मुस्लिम, यादव सहित पिछड़ों और वाम कैडरों पर है, वहीं भाजपा सवर्ण और अति पिछड़ों तथा वैश्य वोटरों के जरिए चुनावी वैतरणी पार करने की जुगाड़ में है।उधर यह भी कहा जा रहा है कि वीआईपी उम्मीदवार  नीलाभ कुमार सहनी और निषादों के अलावा अपने प्रभाव से सवर्ण मतदाताओं को आकर्षित कर सकते हैं। लेकिन कुढ़नी में अल्पसंख्यक वोट बैंक में बिखराव ना हो इसे लेकर राजद और जदयू दोनों मेहनत कर रहे हैं और लोगों को एआईएमआईएम को भाजपा का बी टीम बताकर निशाना साधने की कोशिश कर रहे हैं। तेजस्वी यादव ने बुधवार को कुढ़नी के तुर्की में जनसभा करते हुए बताया कि ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम भाजपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है।यदि लोगों को लगता है कि दोनों अलग हैं तो ऐसा नहीं है। तेजस्वी ने कहा कि एआईएमआईएम की पार्टी आखिर अपने गढ़ हैदराबाद में होने वाले उपचुनाव में क्यों नहीं लड़ रही है? ओवैसी की पार्टी हैदराबाद के साथ तेलांगना और आंध्र कहीं भी उपचुनाव में नहीं लड़ रही फिर बिहार में हो रहे उपचुनाव में क्यों लड़ रही है? यह समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि भाजपा ओवैसी के साथ मिलकर अल्पसंख्यक वोट के बिखराव की राजनीति कर रही है ताकि, गठबंधन को नुकसान हो। लोगों को एआईएमआईएम को सबक सिखाना चाहिए।

लेखक : न्यूजवाणी के बिहार के प्रधान संपादक हैं और यूएनआई के ब्यूरो चीफ रह चुके हैं

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