भंडारे की तैयारी में बदलाव, गैस खत्म होने पर अपनाया नया इंतजाम

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Panchkula bhandara

सिलेंडर की कमी से प्रभावित व्यवस्था, रोटी-पूड़ी बनाने के लिए डीजल भट्ठी का सहारा

पंचकूला स्थित माता मनसा देवी क्षेत्र में चल रहे भंडारे की तैयारियों के बीच एक अलग ही चुनौती सामने आई। कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की कमी के चलते आयोजकों को भोजन व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा। स्थिति ऐसी बनी कि गैस से चलने वाली मशीनें बंद करनी पड़ीं और रोटी-पूड़ी बनाने के लिए डीजल भट्ठी का सहारा लेना पड़ा।

भंडारे में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिसके चलते भोजन की व्यवस्था लगातार बनाए रखना जरूरी होता है। लेकिन गैस सिलेंडर खत्म होने के बाद कामकाज प्रभावित होने लगा। ऐसे में आयोजकों ने तुरंत वैकल्पिक व्यवस्था करते हुए डीजल भट्ठी मंगवाई, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।

डीजल भट्ठी पर खाना बनाने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत धीमी और श्रमसाध्य होती है। यही कारण है कि रसोई में अतिरिक्त मजदूरों की व्यवस्था करनी पड़ी। पहले जहां मशीनों की मदद से कम समय में अधिक मात्रा में रोटियां और पूड़ियां तैयार हो जाती थीं, वहीं अब मैनुअल तरीके से काम करना पड़ रहा है।

आयोजकों का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को बिना किसी बाधा के भोजन उपलब्ध कराना है। गैस की कमी के बावजूद उन्होंने व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किए हैं।

यह स्थिति एक बार फिर दर्शाती है कि बड़े आयोजनों में संसाधनों की उपलब्धता कितनी महत्वपूर्ण होती है। फिलहाल, डीजल भट्ठी के जरिए भंडारे का काम जारी है और श्रद्धालुओं को नियमित रूप से भोजन वितरित किया जा रहा है।

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