एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच तेज, अग्रिम राहत के लिए अदालत की शरण
पंचकूला में सामने आए चर्चित भूमि पंजीकरण प्रकरण में प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस मामले में जिला राजस्व अधिकारी (डीआरओ) जोगिंद्र का नाम सामने आने के बाद एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच का दायरा और व्यापक हो गया है। जांच एजेंसी द्वारा की जा रही कार्रवाई के बीच संबंधित अधिकारी ने कानूनी सुरक्षा के लिए अदालत का रुख करते हुए अग्रिम जमानत की याचिका दायर की है।
मामला उस भूमि से जुड़ा बताया जा रहा है, जो पहले पर्ल ग्रुप के नाम दर्ज थी और बाद में कथित रूप से नियमों की अनदेखी करते हुए रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की गई। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि संबंधित जमीन डीआरओ जोगिंद्र के चचेरे भाई के नाम दर्ज पाई गई, जिससे हितों के टकराव और नियम उल्लंघन की आशंका और गहरी हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, एसीबी इस पूरे मामले में दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है। जमीन के स्वामित्व, रजिस्ट्री प्रक्रिया, अधिकारियों की भूमिका और नियमों के पालन को लेकर कई बिंदुओं पर जांच केंद्रित की गई है। प्रारंभिक जांच में रजिस्ट्री से जुड़े कुछ अहम रिकॉर्ड में अनियमितताओं के संकेत मिले हैं, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
जांच एजेंसी यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रजिस्ट्री के दौरान किसी प्रकार का दबाव, मिलीभगत या अनुचित लाभ तो नहीं लिया गया। यदि आरोप सिद्ध होते हैं, तो यह मामला केवल प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित न रहकर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में तब्दील हो सकता है।
वहीं, डीआरओ जोगिंद्र की ओर से यह तर्क दिया गया है कि उन्हें झूठा फंसाया जा रहा है और उन्होंने सभी प्रक्रियाओं का पालन नियमों के अनुसार किया है। अदालत में दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि उन्हें अग्रिम राहत मिलती है या नहीं।
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