वार्ड परिसीमन पर सांसद का हमला, आरक्षण गणना पर उठे सवाल

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Panchkula ward delimitation

पंचकूला में वार्डबंदी को लेकर वरुण मुलाना ने सरकार को घेरा

पंचकूला में प्रस्तावित वार्डबंदी (डीलिमिटेशन) को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। इस मुद्दे पर सांसद वरुण मुलाना ने खुलकर विरोध जताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि वार्डबंदी में अनुसूचित जाति (SC) आबादी के आंकड़ों को जानबूझकर कम दिखाया गया है, जिससे आरक्षित सीटों की संख्या घटा दी गई। सांसद का दावा है कि करीब 29 हजार एससी आबादी को गणना में शामिल नहीं किया गया, जो सीधे तौर पर सामाजिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।

वरुण मुलाना ने कहा कि पंचकूला जैसे शहरी क्षेत्र में यदि आबादी के सही आंकड़ों को नजरअंदाज कर वार्ड तय किए जाएंगे, तो इसका सीधा असर प्रतिनिधित्व पर पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा कमजोर वर्गों की राजनीतिक हिस्सेदारी कम करने की है। सांसद ने यह भी कहा कि एक तरफ एससी सीटें घटाई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर बीसी-ए और बीसी-बी वर्गों में 100 प्रतिशत आरक्षण दिखाकर संतुलन को बिगाड़ा गया है।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब संविधान और आरक्षण नीति आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व की बात करती है, तो फिर पंचकूला में अलग मापदंड क्यों अपनाए जा रहे हैं। सांसद ने मांग की कि वार्डबंदी से पहले जनसंख्या के वास्तविक और अद्यतन आंकड़ों को सार्वजनिक किया जाए, ताकि किसी भी वर्ग के साथ अन्याय न हो।

वरुण मुलाना ने चेतावनी दी कि यदि वार्डबंदी की प्रक्रिया में सुधार नहीं किया गया, तो इस मुद्दे को सड़क से लेकर सदन तक उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक मामला नहीं, बल्कि सामाजिक अधिकारों से जुड़ा विषय है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वार्डबंदी को लेकर उठे सवाल आने वाले निकाय चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकते हैं। खासकर जब आरक्षण और प्रतिनिधित्व से जुड़ी बात सामने आती है, तो इसका असर जनभावनाओं पर पड़ता है।

अब देखना यह होगा कि सरकार सांसद के आरोपों पर क्या रुख अपनाती है और क्या वार्डबंदी की प्रक्रिया में किसी तरह का संशोधन किया जाता है या नहीं।

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