प्रदेश में सत्तारूढ़ संगठन का संवाद-संवर्धन अभियान, राजधानी में होगा विशेष अभ्यास

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कार्यकर्ताओं की वाणी और प्रस्तुति निखारने पर जोर, वरिष्ठ मार्गदर्शक देंगे दिशा

प्रदेश की राजनीति में सक्रिय सत्तारूढ़ संगठन ने अपने जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों की सार्वजनिक अभिव्यक्ति को प्रभावी बनाने के उद्देश्य से एक व्यापक क्षमता-विकास कार्यक्रम तय किया है। इस पहल का मकसद जनसभाओं, मीडिया संवाद और सामाजिक मंचों पर विचारों को स्पष्ट, संतुलित और प्रभावशाली ढंग से रखने की दक्षता को बढ़ाना है। कार्यक्रम राजधानी शहर में आयोजित किया जाएगा, जहां विभिन्न स्तरों के प्रतिनिधि एकत्र होकर विशेषज्ञों से मार्गदर्शन प्राप्त करेंगे।

आयोजन के दौरान नीति, वैचारिक स्पष्टता, भाषण संरचना, तथ्यों की प्रस्तुति और विरोधी सवालों का उत्तर देने जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी। यह भी समझाया जाएगा कि संवेदनशील मुद्दों पर संवाद करते समय भाषा की मर्यादा और तथ्यात्मक सटीकता कैसे बनाए रखी जाए। संगठन का मानना है कि बेहतर संवाद से न केवल जनता तक योजनाओं की सही जानकारी पहुंचेगी, बल्कि गलतफहमियों को भी समय रहते दूर किया जा सकेगा।

इस अभ्यास में मुख्य मार्गदर्शक के तौर पर प्रदेश के मुखिया नायब सिंह सैनी और राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी उपस्थित रहेंगे। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक अनुभव रखने वाले अरुण जेटली से जुड़े विचार-परंपरा के विशेषज्ञ भी सत्रों में भाग लेंगे। वरिष्ठ वक्ताओं के अनुभव से प्रतिभागियों को वैचारिक मजबूती और व्यवहारिक कौशल दोनों का लाभ मिलेगा।

कार्यक्रम को चरणबद्ध तरीके से आयोजित करने की योजना है, ताकि अधिकतम प्रतिनिधियों तक प्रशिक्षण पहुंच सके। पहले चरण में प्रदेश मुख्यालय स्तर पर अभ्यास होगा, इसके बाद जिलों में भी इसी तरह के संवाद-संवर्धन कार्यक्रम कराए जाएंगे। आयोजकों का कहना है कि बदलते राजनीतिक परिदृश्य में प्रभावी अभिव्यक्ति उतनी ही जरूरी है जितनी नीति और कार्ययोजना।

कुल मिलाकर यह पहल संगठन की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत कार्यकर्ताओं को आधुनिक संचार कौशल से लैस कर जनता के साथ मजबूत और भरोसेमंद संवाद स्थापित किया जा सके।

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