जातीय जनगणना पर बिहार मे सियासत तेज, किन्नर नेता ने बताया अपराध

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पटना : बिहार में शुरु हुई जातिगत जनगणना को लेकर सियासत थमने का नाम नहीं ले रही है। नीतीश सरकार जहां यह दावा कर रही है कि जातिगत गणना के बाद विकास को गति मिलेगी , वहीं विपक्षी भाजपा का कहना है कि नीतीश कुमार राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव की तरह बिहार में जातीय उन्माद फैलाना चाह रहे हैं। इस बीच बिहार की किन्नर (ट्रांसजेंडर) नेता रेशमा प्रसाद ने  जातिगत जनगणना को अपराध बताया है। उन्होंने कहा कि जहां जाति की बात होगी, वहां समानता की बात नहीं हो सकती है। रेशमा प्रसाद ने कहा कि सरकार किसी की जाति पूछने वाली होती कौन है? अगर ऐसी ही बात है तो सरकार को स्पेशल मैरिज एक्ट को खत्म कर देना चाहिए। जो लोग जाति और धर्म की बात करते हैं उन्हें सांप्रदायिक कहा जाता है तो किस आधार पर जाति आधारित जनगणना हो रही है? अगर जाति की बात हो रही है तो वह बिल्कुल गलत है। वहां कहीं से भी समानता और न्याय की बात नहीं हो सकती है। पूरे विश्व में जाति और धर्म के नाम पर अलगाव की स्थिति है, क्या लोगों की जाति को स्थापित कर उसे दूर किया जा सकता है? उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना से समाज में असमानता फैलेगी। सरकार को किसी की जाति पूछने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि यहां के राजनेता नहीं चाहते हैं कि बिहार जाति के बंधन से आगे बढ़े। हालांकि बहुत से ऐसे अच्छे नेता हैं, जिन्होंने दूसरी जाति और धर्म में जाकर शादियां की और जाति के बंधन को तोड़ने की कोशिश की है। रेशमा प्रसाद ने कहा कि बिहार में कराई जा रही जातिगत जनगणना किसी अपराध से कम नहीं है। उन्होने  कहा कि बिहार सरकार अगर विकास के प्रति ईमानदार है तो उसे लोगों की जाति पूछने की जरूरत ही नहीं है। जो लोग जाति की बात करते हैं वे अंबेडकर को नहीं मानने वाले हैं। बाबा साहेब ने कहा था कि देश में जाति को खत्म करना है। अगर लोगों के जातियों की गिनती की जाती है तो यह इंसानियत के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि बिहार के नेता जाति के नाम पर सिर्फ और सिर्फ राजनीति करते हैं। खासकर बिहार में ट्रांसजेंडर कम्यूनिटी के लिए बहुत बुरी हालत है। जब हम कह रहे हैं कि हम ट्रांसजेंडर हैं तब भी हमें ओबीसी की कटेगरी में डाल दिया जाता है। ओबीसी कटेगरी जातियों पर आधारित है।

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