न्यायाधीश की कार जाम में अटकी, शीर्ष पुलिस अधिकारी को तलब

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Punjab and Haryana High Court

हाईकोर्ट ने मांगा जवाब; विपक्षी मार्च की अनुमति पर उठे सवाल

राजधानी चंडीगढ़ में ट्रैफिक जाम के दौरान एक न्यायाधीश की गाड़ी फंसने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य के पुलिस प्रमुख को तलब किया है। अदालत ने पूछा है कि संबंधित प्रदर्शन की अनुमति किस स्तर पर और किन शर्तों के तहत दी गई थी।

जानकारी के अनुसार, शहर में कांग्रेस की ओर से पैदल मार्च निकाला जा रहा था, जिसकी अगुआई वरिष्ठ नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा कर रहे थे। मार्च के कारण कई मार्गों पर यातायात प्रभावित हुआ और इसी दौरान न्यायाधीश का वाहन भी जाम में फंस गया।

हाईकोर्ट ने इस पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था और न्यायिक अधिकारियों की आवाजाही सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। अदालत ने राज्य के डीजीपी से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि भविष्य में ऐसे हालात से बचने के लिए क्या प्रोटोकॉल तय हैं।

प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि प्रदर्शन की पूर्व सूचना दी गई थी और सुरक्षा इंतजाम किए गए थे, लेकिन अचानक भीड़ बढ़ने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हुई। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तैयार कर रही है।

इस मामले ने सार्वजनिक प्रदर्शनों, ट्रैफिक प्रबंधन और वीआईपी मूवमेंट के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है। राजनीतिक हलकों में भी इसे लेकर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं, जबकि कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत की सख्ती प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में अहम कदम है।

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