क्या दिल्ली के जहरीले वायु प्रदूषण पर प्रधानमंत्री चुप हैं?
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दिल्ली में बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर केंद्र सरकार और खासकर प्रधानमंत्री को चौकन्ना रहने की अपील करते हुए कहा है कि इस पर चुप्पी स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से पूछा कि प्रधानमंत्री मोदी जी इस समस्या पर क्यों चुप हैं और कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का मसला है।
राहुल ने कहा कि कई माताओं ने उनसे सीधे शिकायत की है कि उनके बच्चे रोज़ाना “जहरीली हवा” में खेलते और पढ़ते हुए बड़े हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि ये माओं की चिन्ताएँ केवल भावनात्मक नहीं हैं — वे अपने बच्चों के दीर्घकालीन श्वसन और स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर भयभीत हैं। राहुल ने कहा कि ऐसे मामलों में केवल समुचित नीतियों और त्वरित कार्रवाई से ही राहत मिल सकती है।
इस दौरान उन्होंने संसद में इस मुद्दे पर विशेष बहस की मांग रखी, ताकि प्रदूषण के स्रोतों, पड़ोसी राज्यों से उठने वाले धुएँ और पराली जलाने जैसे कारणों पर केंद्र व राज्य सरकारें समन्वित रूप से कदम उठा सकें। राहुल ने कहा कि मीडिया कवरेज और नागरिक आक्रोश के बावजूद अगर शीर्ष नेतृत्व सार्वजनिक दिशा-निर्देश और ठोस समाधान नहीं दे रहा, तो जनता का विश्वास घटेगा।
राजनीतिक विरोधाभास के साथ-साथ इस बयान ने प्रशासनिक और सरकारी अंगों की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं — लोगों ने स्वास्थ्य विभागों, परिवहन नीतियों और औद्योगिक उत्सर्जन नियंत्रण को सख्त करने की मांग तेज कर दी है। विशेषज्ञों और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने बार-बार आगाह किया है कि लंबे समय तक उच्च प्रदूषण स्तर बच्चों और बुजुर्गों के लिए गंभीर परिणाम ला सकते हैं।
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