सजा के बीच अस्थायी आज़ादी, सिरसा आश्रम से डिजिटल माध्यम से जुड़ा अनुयायियों से
डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम एक बार फिर जेल से बाहर आया है। यह उसकी 15वीं रिहाई मानी जा रही है। वह गंभीर आपराधिक मामलों में सजा काट रहा है, जिनमें हत्या और साध्वियों के यौन शोषण से जुड़े केस शामिल हैं। जेल से बाहर आने के बाद उसने सिरसा स्थित डेरे से ऑनलाइन सत्संग किया, जिसमें बड़ी संख्या में अनुयायी डिजिटल माध्यम से जुड़े।
जानकारी के अनुसार, राम रहीम को निर्धारित शर्तों के तहत अस्थायी रिहाई दी गई है। इस दौरान उसे सार्वजनिक कार्यक्रमों में सीधे शामिल होने की अनुमति नहीं है, इसलिए सत्संग ऑनलाइन माध्यम से आयोजित किया गया। डेरे से जुड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अन्य डिजिटल चैनलों के जरिए यह कार्यक्रम प्रसारित किया गया।
राम रहीम इससे पहले भी कई बार पैरोल और फरलो पर जेल से बाहर आ चुका है, जिसे लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर बहस होती रही है। विपक्षी दल और सामाजिक संगठन अक्सर सवाल उठाते रहे हैं कि गंभीर अपराधों में सजा काट रहे व्यक्ति को बार-बार राहत कैसे मिल रही है। वहीं, डेरा समर्थक इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताते हैं।
सिरसा और आसपास के इलाकों में इस रिहाई को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया ताकि किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की स्थिति न बने। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि शर्तों का उल्लंघन होने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि राम रहीम को साध्वियों के यौन शोषण और एक पत्रकार की हत्या के मामलों में दोषी ठहराया गया था, जिसके बाद उसे लंबी सजा सुनाई गई। इसके बावजूद उसकी बार-बार होने वाली अस्थायी रिहाई लगातार चर्चा का विषय बनी हुई है।
प्रशासन का कहना है कि रिहाई पूरी तरह नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत दी गई है। वहीं, इस घटनाक्रम ने एक बार फिर न्याय व्यवस्था, पैरोल नीति और अपराधियों को मिलने वाली राहत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
![]()











